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रैपिड रेल : मिली ऑक्सीजन, अब तेज गति से होंगे काम

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मेरठ। ऑक्सीजन सिलिंडर मिलने से रैपिड रेल के कार्य अब और तेज गति से होंगे। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ने खुद ही ऑक्सीजन लेनी बंद कर दी थी। अब स्थिति सामान्य होने पर प्रोजेक्ट को फिर से सप्लाई शुरू कर दी गई है। पानी और बिजली की लाइन को शिफ्ट करने में ऑक्सीजन सिलिंडर का उपयोग किया जा रहा है।
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82 किलोमीटर के सरायकाले खां से मोदीपुरम तक के आरआरटीएस कॉरिडोर की समीक्षा शहरी विकास मंत्रालय की ओर से की जाती है। इस प्रोजेक्ट पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा भी होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट की गति बढ़ा दी गई है। शहरी विकास मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा वर्ष-2022 तक पहली रैपिड रेल संचालन का दावा कर चुुके हैं। इसी को देखते हुए कार्य किए जा रहे हैं, जिससे पहले चरण में साहिबाबाद से दुहाई तक रैपिड रेल का संचालन शुरू किया जा सके। मेरठ में परतापुर इंटरचेंज से ब्रह्पुरी तक एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाना है। इसके बाद 5 किमी का बेगमपुल तक भूमिगत ट्रैकऔर फिर मोदीपुरम तक एलिवेटेड ट्रैक का निर्माण होगा।
इसलिए जरूरी है ऑक्सीजन सिलिंडर
पाइप लाइन के स्थानांतरण के लिए कटिंग का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए काफी संख्या में ऑक्सीजन सिलिंडर की मांग है। दिल्ली रोड पर नवीन मंडी से आगे शुरू होने वाले भूमिगत ट्रैक के कार्य के लिए पाइपलाइन को स्थानांतरित किया जाना है। इसके लिए ऑक्सीजन सिलिंडर का उपयोग किया जा रहा है। एलिवेटेड ट्रैक में सरिये, पिलर आदि की कटिंग में ऑक्सीजन सिलिंडर जरूरी हैं। इसके अलावा शताब्दी नगर कॉस्टिंग यार्ड में भी ऑक्सीजन सिलिंडर से कार्य शुरू हो गया है।
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तेजी से शुरू हो गया कार्य
अब सिलिंडर की आपूर्ति शुरू हो गई है। इससे कार्य भी तेज गति से शुरू कर दिया गया है। मरीजों के स्वास्थ्य को देखते हुए दूसरी लहर में हमने सिलिंडरों की आपूर्ति बंद कर दी थी। - पुनीत वत्स, जनसंपर्क अधिकारी, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम
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