अपने बच्चों के साथ शहीद मनवीर की पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
किसान सुमेर सिंह कहते हैं कि बेटे की मौत का उन्हें आज तक गम है। पूरा परिवार इस बात का यकीन ही नहीं कर पाता कि मनवीर हमारे बीच नहीं है। वह सबका लाडला था। आज भी परिवार के सदस्य रोज लाडले को याद करते हैं।
अब बच्चे ही मेरी जिंदगी का मकसद : पिंकी
शहीद मनवीर की पत्नी पिंकी का कहना है कि हादसे के बाद जिंदगी बेमायने सी हो गई थी। लेकिन फिर बच्चों के लिए जीना शुरू किया। परिवार ने पूरा साथ दिया। वह अपनी बेटी दीपा, साक्षी और बेटे मानिक के साथ रामपुर में ही मिले क्वार्टर में रहती है। पेंशन से घर चल रहा है। ससुराल और मायके वाले सहयोग करते हैं।
पति की जगह बेटे को सीआरपीएफ में भेजेंगे
पिंकी कहती हैं कि अभी बेटा कक्षा 11 में पढ़ता है। जब हादसा हुआ वह बेहद छोटा था। हमने कभी बच्चों को पीड़ा का अहसास नहीं होने दिया। लेकिन बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते गए चीजों को समझते गए। वह स्नातक के बाद बेटे को सीआरपीएफ में ही भेजेंगी। जिंदगी से हार तो नहीं मान सकते हैं।
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