रावण का अंत नजदीक आते ही रामलीलाओं में धर्म प्रेमियों का जन सैलाब उमड़ पड़ा है। शहर में सात स्थानों पर आयोजित रामलीला में कहीं विभीषण शरणागति, समुद्र पूजा तो कहीं शबरी कृपा और सुग्रीव मित्रता आदि का मंचन किया। मेला स्थल पर बच्चों ने खाद्य पदार्थों का आनंद लिया।
छावनी स्थित रामलीला का उद्घाटन राम निवास, अमर दत्त शर्मा, राजेंद्र कुमार जैन ने किया। वहीं दीप प्रज्ज्वलन राज कुमार, मुकेश सिंघल, कोमल वर्मा, लोकेश कुमार अग्रवाल ने किया। आरती का सौभाग्य अनुराग जैन, अनिल अग्रवाल, विपिन रस्तोगी, दीपक रस्तोगी और पूजन का प्रशांत मोहन जैन, अभय गुप्ता, रोहित जैन, कुलदीप अग्रवाल को प्राप्त हुआ।
देश के प्रसिद्ध कलाकारों मंचन में सर्व प्रथम रावण का दरबार दिखाया। विभीषण को रावण ने लात मारकर लंका से निकाल दिया। रावण कृत्य से निराश विभीषण श्रीराम की शरण में पहुंचा। लंका पर चढ़ाई से पूर्व श्रीराम ने समुद्र पूजा की और मार्ग बनने के बाद अंगद को अपना दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजा। रावण ने अंगद की सभी बातोें को अस्वीकार कर दिया। युद्ध के साथ राक्षसों का अंत आरंभ हो गया। मेघनाथ के द्वारा छोड़ी गई अमोघ शक्ति से लक्ष्मण मूर्छित हो गए।
हनुमान जी लक्ष्मण को बचाने के लिए संजीवनी बूटी का पहाड़ लाए और लक्ष्मण को प्राण प्राप्त हुए। श्रीराम और कुंभकरण के बीच भीषण युद्ध हुआ और कुंभकरण का उद्धार हुआ। पवन गर्ग, गणेश अग्रवाल, अंकित सिंघल, राजीव मित्तल, अमन गुप्ता, नितिन, मोहल लाल गर्ग मौजूद रहे।
शहर स्थित जिमखाना मैदान में आयोजित रामलीला में पूजन के बाद लीला आरंभ हुआ। शाम ढलते ही जिमखाने में मेले का माहौल बन गया। अस्थायी बाजार में बच्चे और बड़े सभी चाट पकौड़ी का आनंद लेते नजर आए। वृंदावन से आए ब्रजबहुलावन रासेश्वरी लीला संस्थान के कलाकारों ने शबरी कृपा से लीला आरंभ की। सीता की खोज में निकले श्रीराम और लक्ष्मण एक कुटिया में पहुंचे। शबरी का बरसों का इंतजार खत्म हुआ अपने इष्ट श्रीराम को सामने देख वह सब कुछ भूल गई। भगवान को कहीं फीके बेर न खाने को मिले इसलिए उसने अपने झूठे बेर उनके सामने परोसे। श्रीराम का हनुमान से मिलन हुआ और सुग्रीव से मित्रता हुई।
सुग्रीव को उसका राज्य दिलाने के लिए भगवान श्रीराम ने बाली का वध किया। माता सीता की खोज के लिए पूरी वानर सेना विभिन्न दिशाओं में निकल गई। मंचन में मुख्य रूप से जितेंद्र मणि, मनोज अग्रवाल, द्वारका नाथ चौबे, मनोज माहेश्वरी, अशोक कुमार बंसल, पंकज अग्रवाल, सचिन जिंदल, मनोज गुपता, राकेश गुप्ता, सतीश कुमार मित्तल, अंशुल बंसल मौजूद रहे।
हनुमान जी ने किया लंका दहन
पंजाबीपुरा में आयोजित रामलीला में बाली वध का मंचन हुआ। श्रीराम ने बाली और सुग्रीव के बीच हो रहे युद्ध में अपने तीर से बालि का वध किया। सुग्रीव ने सिंहासन संभाला और पूरी वानर सेना माता सीता की खोज में निकल गई। हनुमान जी ने अशोक वाटिका को तहस नहस किया और रावण के दरबार में पहुंच उसका अहंकार तोड़ा। लंका दहन के साथ लीला समाप्त हुई। जगन्नाथ मनचंदा, सुनील चितकारा, दीपक शर्मा, आशीष, अनिल, सतीश, सन्नी, प्रदीप गुप्ता, राजकुमार शर्मा रहे। वहीं रजबन फुटबॉल ग्राउंड में आयोजित रामलीला में स्थानीय कलाकारों ने दिखाया कि मंथरा ने कैकई को प्रेरित किया। इसके बाद कैकई ने राजा दशरथ से भरत के लिए सिंहासन और श्रीराम के लिए 14 वर्ष क वनवास मांगा। मंचन में राजेश यादव सेठी, सुनील कनौजिया, दिनरेश यादव कल्लू, सुदेश अवस्थी, रजनीश यादव, अभिषेक शर्मा मौजूद रहे।
श्रीराम ने दी विभीषण को शरण
सूरजकुंड स्थित बाबा मनोहर नाथ मंदिर में आयोजित रामलीला में मथुरा से आए कलाकारों ने लंका दहन से मंचन आरंभ किया। रावण के आदेश पर राक्षसों ने हनुमान जी की पूछ में आग लगा दी और हनुमान जी ने लंका को जला दिया। दरबार में विभीषण ने रावण को समझाने के प्रयास किया। रावण ने अहंकार वश विभीषण को लंका से निकाल दिया। श्रीराम ने विभीषण को शरण दी। पीठाधीश्वर निलिमां नंद जी महाराज, अनिल कुमार, मनोज वर्मा, कमल दत्त शर्मा, सुभाष चंद्र अग्रवाल, विपिन कुमार गोयल, महेश चंद्र गुप्ता, अशोक मित्तल, विवेक वाजपेयी मौजूद रहे। वहीं प्रह्लाद नगर रामलीला में स्थानीय कलाकारों ने श्रीराम सुग्रीव की मित्रता को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। सुग्रीव को उसका राज्य और पत्नी वापस दिलाने के लिए श्रीराम ने बाली का वध किया। अवतार सिंह गुंबर, अश्वनी भारद्वाज, अशोक मलाई, अश्वनी बुद्धिराजा, सोमनाथ, अजय भारद्वाज, अशोक पहुजा, हरीश गुंबर, अनु भोला मौजूद रहे। वहीं जेलचुंगी पर आयोजित रामलीला का शुभारंभ बाली के वध से हुआ। नल, नील, अंगद आदि वानरों ने हनुमान जी की शक्ति को जागृत किया। अजय वर्मा, लोकेश, दिनेश कुमार, अमित कुमार, सचिन कुमार, अक्कू, भोला, दिलमणि मौजूद रहे।