मदरसा इस्लामिया अरबिया मिफ्ताह उल उलूम दमगढ़ी के कारी गुलसनव्वर ने रमजान की फजीलतों (महत्व) के बारे में कहा कि आमतौर पर साल के ग्यारह महीने तक इंसान दुनियादारी के मसलों फंसा रहता है। लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना सादगी के साथ इबादत के लिए तय किया है।
उन्होंने बताया कि रमजान के मायने संपन्न लोगों को भूख-प्यास का अहसास कराकर पूरी कौम को अल्लाह ताआला के करीब लाकर नेक राह पर डालना है। मदरसा फैज महमूद खिवाई के मोहतमिम मौलाना मैराज कासमी ने बताया कि रमजान का महीना सबसे बड़ी आसमानी किताब यानी कुरान शरीफ को दुनिया पर नाजिल किया था। रहमत और बरकत के नजरिये से रमजान के महीने को तीन हिस्सों (असरों) में बांटा गया है। इस महीने के पहले दस दिनों में अल्लाह अपने रोजेदार बंदों पर रहमतों की बारिश करता हैं। दूसरे असरे में अल्लाह रोजेदारों के गुनाह माफ करता है और तीसरा असरा दोजख की आग से निजात पाने की इबादत के लिए तय किया गया हैं।
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