यूपी के मेरठ जिले में एक सप्ताह से किसान अपनी मांगों को लेकर एमडीए कार्यालय में धरने पर बैठे हैं। मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी किसानों से मिलने पहुंचे और उनके आंदोलन को और मजबूती दे दी। इस दौरान एमडीए कार्यालय के बड़े गेट का ताला लगा हुआ था। किसानों ने पुलिस से कहा कि ताला खुद ही खोल दो वरना हम तोड़ देंगे। इसके बाद पुलिस ने ताला खोल दिया। दिलचस्प बात यह है कि राकेश टिकैत मंच पर नहीं बल्कि किसानों के साथ जमीन पर ही बैठे। राकेश टिकैत ने कहा कि एमडीए में झोपड़ियां डाल लो, तभी इसका हल निकलेगा। दरअसल, एमडीए बोर्ड में अनुमोदन होने के बावजूद अभी तक प्रतिकर न मिलने से गुस्साए किसानों ने एमडीए कार्यालय पर हल्ला बोल दिया।
गौरतलब है कि इससे पहले किसानों ने ‘डेरा डालो घेरा डालो आंदोलन’ का बिगुल फूंकते हुए ट्रैक्टर ट्रालियों में किसान एमडीए पहुंचे थे। इसके बाद सभी गेटों पर महिला किसानों ने कब्जा कर अधिकारियों को कार्यालयों में ही बंधक बना दिया था। शाम को अधिकारियों को बिना गाड़ी के पैदल ही ऑफिस से निकलना पड़ा था। किसान रात को भी एमडीए में ही डटे थे। किसानों ने कहा कि जब तक किसानों को चेक नहीं दिए जाएंगे या शासन से आई अनुमति को नहीं दिखाई जाएगी, आंदोलन जारी रहेगा।
यह है विवाद
प्रतिकर की मांग को लेकर लोहियानगर, गंगानगर तथा वेदव्यासपुरी योजना के किसानों ने आंदोलन किया। किसानों का कहना था कि शताब्दीनगर की तर्ज पर उन्हें भी मुआवजा दिया जाए। लगातार आंदोलन के बाद इस पर सहमति बनी। 11 नवंबर 2015 को एमडीए बोर्ड बैठक में परिचालन प्रस्ताव के माध्यम से यह प्रस्ताव मंजूर हो चुका है कि किसानों को रकम के बदले भूखंड दिए जाएंगे। बाद में बुलंदशहर के प्रकरण में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए एमडीए अधिकारियों ने इस वादे पर अमल नहीं किया। किसानों ने दबाव बनाया तो एमडीए ने शासन की अनुमति को यह प्रस्ताव भेज दिया जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।
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