कांता कर्दम को प्रत्याशी बनाए जाने के पीछे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि एक तीर से दो निशाने पार्टी ने साधे हैं। एक तरफ जहां 8 प्रत्याशियों में एक महिला को प्रत्याशी बनाया जाना जरूरी था, वहीं पश्चिमी क्षेत्र में अनुसूचित जाति के बीच पैठ बनाने के लिए एससी कार्ड भी खेलना था। ऐसे में कांता कर्दम दोनों ही उद्देश्यों की पूर्ति करती नजर आईं। पार्टी नेतृत्व ने बिना समय गवाएं कांता कर्दम को राज्यसभा भेजने का निर्णय ले लिया।
विजयपाल तोमर से किसानों पर हाथ
विजयपाल तोमर ने राजनीति चौधरी चरण सिंह के सानिध्य में शुरू की थी। 1998 में वह भाजपा में आये, ऐसे में वह किसानों की राजनीति के पुराने धुरंधर माने जाते हैं। पश्चिमी क्षेत्र में जाट, गुर्जर के बाद ठाकुर वोट अहम हैं। विजयपाल तोमर ठाकुर बिरादरी के हैं और किसानों की राजनीति करते हुए उनके सभी बिरादरियों में अच्छी पकड़ है। पश्चिमी क्षेत्र जहां राजनीति का बड़ा आधार किसानों पर टिका है। वहां विजयपाल तोमर के माध्यम से पार्टी ने किसानों को साधने का प्रयास किया है।
वाजपेयी ने साधा मायावती पर निशाना
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने यूपी से 9 राज्यसभा सदस्य बनने पर पार्टी नेतृत्व को बधाई देते हुए कहा कि कुशल रणनीति के तहत भाजपा की जीत हुई है। इसके साथ ही उन्होंने बसपा सुप्रीमो मायावती पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने उनकी हत्या का प्रयास किया, उनके साथ मायावती ने हाथ मिला लिया। जिस पार्टी ने उनकी जान बचायी और तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, उसके खिलाफ खड़ी हो गई। मायावती को इसका कारण बताना चाहिए।
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