सड़कों की गुणवत्ता को लेकर शासन और प्रशासन के भले ही बड़े-बड़े दावे हों, लेकिन धरातल पर अधिकारियों की देखरेख में में चल रहे सड़क निर्माण में ही नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शहर के मुख्य मार्गों के निर्माण भी ठेकेदार की मनमर्जी पर छोड़ दिया गया है। मेट्रो प्लाजा से भूमिया पुल तक सवा करोड़ से बनाई जा रही सड़क में जमकर खेल हो रहा है। सड़क किनारे लगाई जा रही टाइल्स को रेत पर लगाया जा रहा है।
दो किमी की सड़क पर सवा करोड़ खर्च
मेट्रो प्लाजा से भूमिया पुल की दूरी करीब दो किमी है। इस मार्ग को पीडब्लूडी बना रहा है। इस पर लगभग एक करोड़ 25 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसमें डेन्स सड़क और सड़क की पटरी पर टायल्स लगाने का कार्य किया जाना है। पीडब्लूडी डेंस की सड़क का कार्य पूरा कर चुका है। लेकिन सड़क किनारे टायल्स लगाने का काम चल रहा है।
ये है सड़क और टायल्स लगाए जाने नियम
-किसी भी सड़क को डेंस से बनाने अथवा टायल्स से बनाने के लिए सबसे पहले उसका बेस मजबूत किया जाता है। इसमें पत्थर, रेत, डस्ट आदि का मिश्रण डाला जाता है। टायल्स लगाने से पहले उसके नीचे कम से कम तीन इंच और ज्यादा से ज्यादा आठ इंच मोटी परत पत्थर आदि सामग्री के मिश्रण की डाली जाती है। सड़कों की गुणवत्ता सुधारने के लिए कमिश्नर डा. प्रभात कुमार ने आईएसआई टायल्स लगाने का आदेश जारी किया है।
साढे़ चार लाख का पत्थर पचाया
पीडब्लूडी द्वारा सड़क किनारे लगाई जा रही टायल्स के नीचे मजबूत बेस नहीं तैयार किया जा रहा है। बल्कि बालू और मिट्टी के मिश्रण के ऊपर टाइल्स बिछाई जा रही हैं। निर्माण विभाग के गणित के मुताबिक अगर मेट्रो प्लाजा से भुमिया पुल की दूरी दो किलोमीटर है तो 240 क्यूविक मीटर पत्थर और अन्य मिश्रण सामग्री होनी चाहिए। इसकी कीमत लगभग 4.53 लाख बैठती है। ऐसे में आरबीएम न डालने के पीछे लगभग चार लाख रुपये के भ्रष्टाचार की मंशा सामने आ रही है। टायल्स आईएसआई मार्क हैं या नहीं इसकी भी जांच पीडब्लूडी अधिकारी नहीं कर रहे हैं।