इस दिवाली की रात शहर के रेलवे रोड और बेगमपुल एरिया में सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण रिकॉर्ड किया गया। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मानें तो पांच साल में यहां सबसे ज्यादा पटाखे छोड़े गए। जहां प्रदूषण का स्तर आम दिनों के मुकाबले करीब 15 से 20 डेसीबल ज्यादा रहा। रेलवे रोड क्षेत्र कॉमर्शियल श्रेणी में आता है, जहां लगातार दूसरे साल यह स्तर बढ़ा आया तो सबसे कम कैंट अस्पताल एरिया में रहा।
इस बार चाइनीज पटाखों के विरोध को देखकर लग रहा था कि इस बार दिवाली पर आतिशबाजी का जोर कम रहेगा। लेकिन यह अंदेशा गलत साबित हुआ। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. योगेंद्र कुमार व सहायक वैज्ञानिक पवन कुमार मिश्रा ने बताया कि क्षेेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस बार भी शहर में आठ प्रमुख स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण की जांच के लिए इक्यूपमेंट लगाए थे। जिनके माध्यम से दिवाली से पहले और दिवाली की रात पटाखों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण का स्तर दर्ज किया गया। जांच में आम दिनों के मुकाबले व्यवसायिक और आवासीय दोनों इलाकों में ही सामान्य से अधिक ध्वनि प्रदूषण दर्ज किया गया।
ध्वनि प्रदूषण आंकड़ों में 2016
स्थान 24 अक्तूबर 30 अक्तूबर
रेलवे रोड 68.8 85.1
बेगमपुल 70.4 84.9
थापर नगर 55.3 80.1
शास्त्रीनगर 56.6 79.8
पल्लवपुरम 60.2 78.1
कलक्ट्रेट 62.2 75.3
कैंट बोर्ड 52.3 60.4
कैंट अस्पताल 51.3 55.9
गत वर्ष के आंकड़े (2015)
क्षेत्र 5 नवंबर 11 नवंबर
रेलवे रोड - 66.4 80.4
बेगमपुल - 67.8 78.2
थापर नगर - 54.2 75.9
शास्त्रीनगर - 52.4 75.9
पल्लवपुरम - 55.8 73.9
कलक्ट्रेट - 60.9 72.4
कैंट बोर्ड - 48.2 61.2
कैंट अस्पताल - 50.8 52.5
दिवाली पर 2012 के आंकड़े
रेलवे रोड 80.2
बेगमपुल 81.0
थापरनगर 80.6
शास्त्रीनगर 80.0
पल्लवपुरम 71.6
कैंट बोर्ड 65.6
कैंट अस्पताल 63.4
(आंकड़े डेसीबल में हैं, रेलवे रोड और बेगमपुल व्यावसायिक, कैंट अस्पताल और कलक्ट्रेट संवेदनशील जबकि थापर नगर, शास्त्रीनगर और कैंट बोर्ड एरिया आवासीय श्रेणी में हैं)
ये हैं मानक
संवेदनशील क्षेत्र में 40 से 50, आवासीय में 45 से 55, व्यावसायिक क्षेत्र में 55 से 65 डेसीबल तक स्तर होना चाहिए। जबकि तीनों जगह पर यह स्तर मानक से ज्यादा रिकॉर्ड किया गया।
व्यावसायिक क्षेत्र ने चौंकाया
अमूमन आवासीय क्षेत्र में पटाखों का शोर अधिक देखने को मिलता है। लेकिन इस बार व्यावसायिक क्षेत्र में पटाखों का शोर सबसे अधिक रहा। रेलवे रोड क्षेत्र में जहां ध्वनि प्रदूषण दिवाली की रात 85.1 डेसीबल तो बेगमपुल पर 84.9 डेसिबल दर्ज किया गया। आवासीय क्षेत्र में सबसे कम कैंट एरिया में यह 55.9 डेसिबल रहा। जबकि सबसे अधिक पल्लवपुरम में 78.1 डेसीबल रहा।
ध्वनि प्रदूषण से परेशानी
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अनुसार लाउडस्पीकर, बैंड बाजों, प्रेशर हार्न एवं पटाखों आदि का प्रयोग खुलेआम ध्वनि प्रदूषण की समस्या पैदा करते हैं। जिसका सीधा प्रभाव मानव मस्तिष्क, श्रवण शक्ति एवं पाचन तंत्र पर पड़ता है। जिसमें घबराहट, सिरदर्द, चिड़चिडापन, तनाव, नींद में कमी, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मानसिक क्षमता में कमी, अल्सर एवं बहरापन आदि गंभीर रोगों के पैदा होने की संभावना होती है।