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रेल हादसा : बेबस था मैं कुछ नहीं कर सका, मेरी आंखों के सामने पत्नी ने दम तोड़ा

Mon, 21 Aug 2017 09:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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रामलाल जी की आंखों के सामने गई पत्नी की जान
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‘मैं और पत्नी रामवती उत्कल ट्रेन की क्षतिग्रस्त बोगी में फंसे थे। रामवती तड़प रही थी। लेकिन अफसोस मैं उसकी मदद नहीं कर सका। मैंने अपने साथी से चिल्लाकर कहा कि उसे बचा लो, वो मर रही है। लेकिन कोशिश सफल नहीं हुई और मेरी आंखों के सामने रामवती ने दम तोड़ दिया। एक पल में 30 साल का साथ छूट गया।’
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करौली, राजस्थान निवासी रामजी लाल (60) जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराए गए थे। पत्नी रामवती (50) के साथ हरिद्वार दर्शन करने जा रहे थे। एक ही बोगी में सवार थे। इनके चार बच्चे हैं। वह क्षतिग्रस्त बोगी में खुद ऐसे फंसे थे कि निकल नहीं पा रहे थे। जब उन्हें लगा कि वह पत्नी को नहीं बचा सकते तो उन्होंने अपने परिवार के ही सदस्य परमाल (50) को आवाज लगाकर कहा कि किसी तरह रामवती को बचा ले। लेकिन बोगी इस कदर क्षतिग्रस्त थी कि वह भी कुछ नहीं कर सका। रामजीलाल को लोगों ने बोगी को काटकर निकाला। उनकी पत्नी को भी लोगों ने निकालने की कोशिश की। लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। वहीं रामजीलाल और परमाल को रविवार को जिला अस्पताल से छुट्टी दे गई। दोपहर में दिल्ली रेलवे से कॉमर्शियल इंस्पेक्टर (सीएमआई) डीसी शर्मा ने दोनों घायलों को 25-25 हजार की सहायता दी।
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