पुलिस की निगरानी में हुआ राहुल का अंतिम संस्कार
मेरठ। चुनावी रंजिश में कुनकुरा गांव में राहुल की हत्या से दूसरे दिन भी ग्रामीणों में आक्रोश रहा। सोमवार को पुलिस बल की निगरानी में राहुल के शव का अंतिम संस्कार हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि हत्यारोपी भाजपा नेता योगेंद्र और उसके परिवार को बचाने का प्रयास कर रही है। ग्रामीणों ने नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर चेतावनी दी कि वह पुलिस अधिकारियों के ऑफिस में जाकर शिकायत करेंगे।
इंचौली थाना क्षेत्र के कुनकुरा गांव में ग्राम पंचायत सदस्य का पर्चा भरने पर रविवार शाम राहुल को गांव के पूर्व ब्लाक प्रमुख योगेेंद्र सिंह के बेटे अंकित ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि प्रधानी चुनाव के समय से ही पूर्व ब्लॉक प्रमुख योगेंद्र और उसके बेटे हत्या करने की धमकी दे रहे थे। आरोपियों ने पहले धमकी दी और फिर राहुल को गोली मारी। इस वारदात को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है।
घटना की जानकारी मिलने पर सोमवार सुबह से ही कुनकुरा स्थित राहुल के घर पर ग्रामीण और रिश्तेदार पहुंचने शुरू हो गए। राहुल की मां राजेश और बहन सहित अन्य परिजन विलाप करते रहे। दोपहर करीब दो बजे शव गांव में पहुंचा। शव के पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। अस्पताल में भर्ती राहुल की पत्नी अंजलि को भी गांव लाया गया। इसके बाद गांव के बाहर स्थित श्मशान में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। छोटे भाई सोनू ने मुखाग्नि दी। बहन सोनिका व मोनिका इस दौरान कई बार बेसुध हो गईं।
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पूर्व प्रमुख के बेटे अंकित को भेजा जेल
- हत्याकांड में गिरफ्तार पूर्व ब्लॉक प्रमुख योगेंद्र के बेटे अंकित को सोमवार जेल भेज दिया गया। वहीं, चर्चा रही कि अबकी बार भी योगेंद्र भाजपा समर्पित जिला पंचायत सदस्य और उनकी पत्नी ग्राम प्रधान प्रत्याशी थे। चुनाव में दोनों ही हार गए। ग्राम पंचायत सदस्य में भी योगेंद्र के बेटे अंकित ने अपने समर्थक को उतार दिया। इसी रंजिश में हत्या की गई। राहुल की मां राजेश ने रोते हुए कहा कि योगेंद्र किसी को आगे नहीं बढ़ने देना चाहता। खुद ही प्रत्येक पद कब्जाना चाहता है।
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भाजपा नेता के दबाव में पुलिस
ग्रामीणों का कहना है कि योगेंद्र ने भाजपा का दामन थामा हुआ है। इसके चलते पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही है। इस विवाद में पूर्व ब्लाक प्रमुख की मुख्य भूमिका है। वह और उसके बेटे गांव के लोगों को धमकी देते थे। पुलिस भाजपा नेता के दबाव में काम कर रही है। जिसको लेकर ग्रामीणों ने इंचौली पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिंह्न लगा हुआ है। पंचायत चुनाव के विवाद को निपटाने में पुलिस पूरी तरह फेल साबित हो गई।