रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की 25 साल की उत्कृष्ट सेवाओं पर शनिवार को वेदव्यासपुरी स्थित 108 वाहिनी परिसर में गर्व किया गया। इस भव्य रजत जयंती समारोह में शहीदों की शौर्य गाथाएं सुनाई गईं। जवानों के संयम और साहस पर देर तक तालियां गूंजती रहीं। देशभक्ति के गीतों के बीच मैदान खचाखच भरा था। कतारबद्ध खड़े आरएएफ के जवानों का उत्साह और जोश साफ झलक रहा था। मुख्य परेड में उत्साह और अनुशासन का संगम शानदार और जबरदस्त रहा। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जवानों का हौसला बढ़ाया।
केंद्रीय पैरा मिलिट्री फोर्स (सीआरपीएफ) की विंग आरएएफ की छह टुकड़ियों ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को सलामी दी। पहली टुकड़ी महिला विंग की थी, जिसे कोयंबटूर असिस्टेंट कमांडेंट विजयलक्ष्मी लीड कर रही थीं। इसके बाद पांच टुकड़ियां पुरुष विंग की रहीं, जिन्हें असिस्टेंट कमांडेंट काशिफ फहीम अलीगढ़, रजनीश सिंह दिल्ली, सुधीर सोनावाले मुंबई, एमएल मीना कोयंबटूर और नवीन सोलंकी भोपाल वाहिनी लीड कर रहे थे।
आरएएफ फ्लैग असिस्टेंट कमांडेंट पवन कुमार लेकर चल रहे थे। इसके पीछे आरएएफ की झांकियां थीं। मार्च पास्ट के अलावा समारोह का आकर्षण ऐसी झांकियां रहीं, जो आरएएफ के गठन के उद्देश्य और उसकी जिम्मेदारियां प्रदर्शित कर रही थीं। झांकियों को देखकर सहज ही अंदाजा लगाया सकता था कि कि सांप्रदायिक घटनाओं को रोकने, पर्यावरण को बचाने, लोगों को शिक्षित करने और राहत कार्य में आरएएफ की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। जवानों और अधिकारियों के अलावा उनके परिवार इस शानदार समारोह के गवाह बने। इस दौरान शहीदों आश्रितों के अलावा अफसरों, जवानों और बटालियनों को बेहतर कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।
देशभक्ति की धुनें छाईं
समारोह में देशभक्ति का माहौल रहा। परेड की एंट्री के वक्त ‘कदम-कदम बढ़ाए जा’ गीत की धुन बजी। मार्च पास्ट में ‘सारे जहां से अच्छा’ गीत बजा। ‘ऐसा देश है मेरा’ और ‘सोने की चिड़िया’ गीत की धुन भी बजी।
आरएएफ एक नजर में
आरएएफ का गठन 7 अक्तूबर 1992 को हुआ था। आरएएफ का संचालन बिना समय गंवाए के सिद्धांत पर आधारित है। सात अक्तूबर 1992 को इसकी स्थापना हुई थी। यह सीआरपीएफ की ही एक विंग है। दंगा हो या सांप्रदायिक माहौल, उसे नियंत्रण करने के लिए इसे भेजा जाता है। फिलहाल देश में आरएएफ की 10 वाहिनी हैं। जिनमें दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल, अलीगढ़, मेरठ, हैदराबाद, जमशेदपुर, कोयंबटूर और इलाहाबाद शामिल है। वर्षगांठ हर साल सभी वाहिनियों में बारी-बारी से मनाई जाती रही है। देश में ही नहीं, बल्कि आरएएफ ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन हैती, सूडान और लाइबेरिया में भी सेवाएं दी हैं। हर बार स्थिति नियंत्रण में कर वाहिनी के जवानों ने अपनी योग्यता साबित की है। मेरठ में दो समुदाय के बीच तनाव, सहारनपुर में हिंसा या मुजफ्फरनगर दंगा इन्होंने काबू में किया था।
नई बटालियनों के लिए यहां बनेंगे कैंप
सीआरपीएफ के महानिदेशक राजीव राय भटनागर ने बताया कि पांच नई बटालियनों के लिए जयपुर, पटना, बंगलूरू, तमिलनाडु और सिलिगुड़ी में कैंप बनाए जाने की तैयारी है। इनमें कई जगह तय हो चुकी हैं, जबकि एक-दो जगह जमीन देखी जा रही है। जगह में कुछ बदलाव भी हो सकता है। फिलहाल नई बटालियनों का प्रशिक्षण चल रहा है।
नहीं आए मनोज सिन्हा
विशिष्ट अतिथि राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जनसंचार मनोज सिन्हा को भी कार्यक्रम में आना था। लेकिन वे नहीं आए। इस संबंध में जब पूछा गया तो आरएएफ के अधिकारियों ने बताया कि स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वे नहीं आ सके।