खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीम ने बृहस्पतिवार को माधवपुरम स्थित तेल, रिफाइंड और घी बनाने की फैक्ट्री एसटीएस ग्रुप में छापा मारा। एफडीए की टीम ने यहां से 11 नमूने लिए हैं। इनमें सरसों के तेल के पांच, रिफाइंड के दो और घी केचार नमूने शामिल हैं। टीम ने 3870 लीटर तेल, घी और रिफाइंड जब्त किया है, जिसकी कीमत तीन लाख 61 हजार 800 रुपये है। अधिकारियाें को संदेह है कि सरसों केतेल में चावल की भूसी का तेल मिलाकर सप्लाई की जा रही है।
एक सूचना के आधार पर एफडीए की टीम सुबह 11 बजे माधवपुरम सेक्टर-1 पहुंची। यहां एसटीएस ग्रुप की फैक्ट्री में उन्हें लाइसेंस आदि दिखाया गया। यहां टीम को अनियमितता नहीं मिली। इसके बाद एफडीए की टीम इसी ग्रुप की सेक्टर-3 स्थित फैक्ट्री गई, जहां बडे़ पैमान पर अनियमितताएं मिलीं। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आनंद देव ने बताया कि यह फैक्ट्री त्रिलोक चंद की है। यहां तेल, घी और रिफाइंड आदि की पैकिंग की जा रही थी। एफडीए टीम ने सैंपल लेते हुए सारा सामान सीज कर दिया। उन्होंने बताया कि त्रिलोक चंद के पास लाइसेंस नहीं था। एफडीए को संदेह है कि चावल की भूसी के तेल को सरसों के तेल में मिलाकर तेल तैयार किया जा रहा था, जिसे सरसों का तेल बताकर बेचा जा रहा होगा। सैंपल ले लिए गए हैं। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। यह कार्रवाई करीब ढाई घंटे चली। इस दौरान मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के अलावा, असिस्टेंट कमिश्नर फूड एंड सेफ्टी राम नरेश यादव और अभिग्रहीत अधिकारी रणधीर सिंह आदि रहे।
उधर, फैक्ट्री संचालक त्रिलोक चंद का कहना है कि यह छापेमारी उनके खिलाफ साजिश है। उनके यहां कोई अनियमितता नहीं मिली है। सारे कागज पूरे हैं। उन्होंने बताया कि यह भी अफवाह फैलाई गई कि कि वह पूर्व पार्षद हैं, जबकि वह कभी पार्षद नहीं रहे।