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रडार पर रियल एस्टेट, व्यापारी और बड़े खातेदार, बैंकों को जारी किया नोटिस

Sat, 10 Dec 2016 01:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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नोट बंदी के बाद से पैदा हुए हालात और बैंकों में जमा हो रहे धन पर नजर रखने के लिए आयकर विभाग ने स्पेशल प्लानिंग की है। इनकम टैक्स के रडार पर सबसे पहले बड़े खातेदार, व्यापारी और खास तौर पर रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारी हैं। यही कारण है कि बैंकों को जारी नोटिस में कहा गया है कि प्रतिदिन लेनदेन का ब्यौरा पेश करें।
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एक माह से नोट बंदी को लेकर बैंकों में भीड़ लगी है, तो दूसरी तरफ आयकर विभाग ने अपने हिसाब से फिल्डिंग सजाई है। खास तौर पर उन खातों को देखा जा रहा है जिनमें बड़ा ट्रांजेक्शन हो रहा है। बैंक पहले ही इसका डाटाबेस तैयार कर रहा हैं। आयकर विभाग ने बैंकों से प्रतिदिन की डिटेल भेजने को कहा है। जनधन खातों पर विशेष नजर है, लेकिन इन खातों का ब्यौरा सबसे बाद में देखा जाएगा। सबसे पहले उन खातों को खंगाला जाएगा, जिनमें करोड़ों का लेनदेन हुआ है।

फिर से धनवर्षा को तैयार विभाग
30 सितंबर तक आयकर विभाग ने 45 प्रतिशत पेनल्टी पर आईडीएस स्कीम चलाई थी। इस इनकम डिक्लेरेशन स्कीम के जरिये काला धन 45 प्रतिशत पेनाल्टी देकर व्हाइट मनी में बदला गया था। इस स्कीम में मेरठ ने वेस्ट यूपी के सभी शहरों को पीछे छोड़ दिया था। लगभग एक हजार करोड़ रुपये इस परिक्षेत्र में इस योजना में आए थे। एक बार फिर से सरकार ने इस स्कीम को चलाने की घोषणा की है। इस बार पेनाल्टी 50 प्रतिशत रहेगी। लेकिन इस बार नोट बंदी का चाबुक भी है। ऐसे में विभाग मानकर चल रहा है कि इस बार इससे भी ज्यादा पैसा आने वाला है।
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इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर नजर
इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन पर विभाग की पैनी नजर है। आठ नवंबर के बाद कितने लोगों ने इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन किया, कितना पैसा अपने खातों से विदेशों को भेजा और कितना मंगवाया, इसका पूरा डाटा तैयार किया जा रहा है।

नोटिस देने की तैयारी
बैंकों से पूरी जानकारी लेने के बाद इनकम टैक्स विभाग इसी सप्ताह बड़े स्तर पर लोगों को नोटिस भेजने की तैयारी में है। फिलहाल फोकस इस पर है कि खातों में किस तरह और कितना लेनदेन हो रहा है। माना जा रहा है कि पहले चरण में ही पांच हजार कारोबारियों को नोटिस जारी होना है।

इस तरह के लेनदेन या जमा पर नजर
इनकम टैक्स विभाग मुख्य रूप से 50 हजार रुपये या इससे ज्यादा नकद जमा करने पर नजर लगाए हैं तो वहीं प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त भी दायरे में है। अहम यह है कि जैसे ही नोट बंदी की घोषणा हुई, वैसे ही लोगों ने ताबड़तोड़ ढंग से सोना खरीदा। गोल्ड की खरीद पर भी आयकर विभाग की दृष्टि है। महंगे वाहन या अन्य महंगे उत्पादों की खरीद को भी देखा जा रहा है। क्रेडिट या डेबिट कार्ड से जमकर परचेजिंग हो रही है। यह भी आयकर की जांच के दायरे में है।
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