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अपने बलबूते पर रालोद मैदान में, वेस्ट यूपी के गड़बड़ाए समीकरण

Sun, 22 Jan 2017 12:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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रालोद से सपा और कांग्रेस के गठबंधन की संभावनाएं लगभग खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में रालोद के अकेले ही मैदान में उतरने से वेस्ट यूपी की कई सीटों पर समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। बदले हालात में रालोद कहीं सपा, भाजपा, बसपा या कांग्रेस तो कहीं खुद भी नुकसान उठा सकता है। फिलहाल, शुक्रवार को आठ प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करने के बाद रालोद ने शनिवार को 35 और सीटों पर भी उम्मीदवार उतार दिए। चुनावी पिच पर रालोद के अकेले बल्लेबाजी करने से मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर और बागपत जिले की विधानसभा सीटों पर क्या असर पड़ेगा, यह तो नतीजे ही बताएंगे। लेकिन, अन्य दलों के समीकरण रालोद की सियासी पैतरेबाजी से गड़बड़ाते नजर आ रहे हैं।
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मुजफ्फरनगर में सियासी खींचतान
शनिवार दोपहर बाद रालोद ने मुजफ्फरनगर की छह सीटों में से चार पर अपने प्रत्याशियों का एलान कर दिया। शहर सीट से पायल माहेश्वरी प्रत्याशी घोषित हुईं। इनके पति संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा का आपराधिक इतिहास है। पायल के मैदान में उतरने से वैश्य मतों में बंटवारा तय है। चरथावल सीट पर सलमान जैदी प्रत्याशी बने हैं। बसपा छोड़कर रालोदी हुए सलमान ने पिछले दिनों चरथावल में बड़ी रैली आयोजित की थी। जिसके बाद से उनका टिकट तय माना जा रहा था। पुरकाजी सुरक्षित सीट से टिकट पाने वालीं छोटी बेगम वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य हैं। एससी से ताल्लुक रखने वाली छोटी ने पुरकाजी निवासी आमिर अली काजमी से निकाह किया था। जिपं सदस्य का चुनाव भी उन्होंने रिजर्व सीट पर लड़ा था, जिसमें एससी के साथ ही दलित वोटों में भी उन्होंने सेंधमारी की थी। रालोद ने इन्हीं समीकरणों को ध्यान में रखा है। शहर सीट से उपचुनाव लड़ चुकीं पूर्व विधायक  मिथलेश पाल को मीरापुर सीट से टिकट मिला है। हालांकि यहां से मेरठ के ताराचंद शास्त्री भी टिकट मांग रहे थे, लेकिन ऐन वक्त पर बाजी मिथलेश के हाथ लगी। खतौली और बुढ़ाना सीट पर प्रत्याशियों की घोषणा रोकी गई है। खतौली रालोद की सिटिंग सीट है। बुढ़ाना भी जाट बहुल सीट मानी जाती है। खतौली पर अभिषेक चौधरी, यनेश तंवर और शाहवर अली टिकट मांग रहे हैं, जबकि बुढ़ाना पर पूर्व मंत्री योगराज नंबरदार और पूर्व विधायक राजपाल बालियान टिकट की लाइन में हैं।

शामली में दूसरों के समीकरण गड़बड़ाएगी नीति
शामली में रालोद ने कैराना सीट से अनिल चौहान को प्रत्याशी बनाया है। रालोद की इस चाल से कैराना सीट पर भाजपा का समीकरण गड़बड़ा सकता है। क्योंकि अभी तक भाजपा में रहे अनिल चौहान की इस सीट से मजबूत दावेदारी थी। साथ ही वह भाजपा सांसद हुकुम सिंह के खानदान से ही ताल्लुक रखते हैं। कैराना सीट पर ही सांसद की बेटी मृगांका सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रही हैं। यदि अनिल चौहान रालोद के टिकट पर कैराना सीट से चुनाव लड़ते हैं, तो वह भाजपा की मुश्किलें बढ़ाएंगे। थानाभवन सीट से रालोद ने जावेद राव को उतारा है। यहां से बसपा से अब्दुल वारिस, सपा से जाट बिरादरी के डॉ. सुधीर पंवार तो भाजपा से सुरेश राणा चुनावी मैदान में हैं। रालोद ने इस सीट पर मुस्लिम चेहरे को प्रत्याशी बनाकर जाट और मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत करने का प्रयास किया है। देखना है कि रालोद के इस दांव से किसे नफा-नुकसान होता है। लेकिन यह तय है कि रालोद की रणनीति चुनावी समीकरणों फेरबदल करने वाली होगी। शामली सीट पर अभी घोषणा नहीं की गई। पूर्व में यहां से रालोद ने वैश्य बिरादरी के प्रत्याशी का मन बनाया था। इसके लिए शामली के पूर्व चेयरमैन राजेश्वर बंसल तथा मौजूदा चेयरमैन अरविंद संगल पर विचार हुआ था। अब यहां से जाट नेता को प्रत्याशी बनाने की कवायद है। इनमें कुछ नेता पार्टी से ही हैं, तो कांग्रेस के विधायक पंकज मलिक को भी प्रत्याशी बनाने पर विचार किया जा सकता है। हो सकता है कि रविवार तक इसकी घोषणा हो जाए। हालांकि अधिकारिक तौर पर किसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है। विधायक पंकज मलिक का कहना है कि वह 23 जनवरी को अपना नामांकन पत्र जमा करेंगे। कांग्रेस छोड़ने या रालोद ज्वाइन करने के बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया है।
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मेरठ के रण में पड़ेगा खासा असर
गठबंधन की आस में शांत बैठी रालोद से सपा ने किनारा कर लिया। अब ऐन मौके पर रालोद अकेले ही मेरठ के रण में उतरने की तैयारी में जुट गई है। तीन सीटों पर प्रत्याशी तय हो चुके हैं, तो बाकी दो सीटों पर भी रालोद प्रत्याशी उतारने का मन बना चुकी है। लेकिन रालोद जिस समीकरण के तहत प्रत्याशी उतार रही है, वह सीधे भाजपा, सपा और बसपा को चोट देंगे।
किठौर सीट पर रालोद से प्रत्याशी मतलूब गौड नगर पंचायत किठौर के चेयरमैन होने के साथ ही क्षेत्र की मुस्लिम राजनीति में खासा असर रखते हैं। कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के विरोधी मुस्लिमों की राजनीति मतलूब के ईद-गिर्द ही घूमती है। ऐसे में मतलूब गौड के आने से जहां सपा को सीधे नुकसान पहुंचता नजर आता है तो अगर थोड़े भी जाट वोट कटे तो वह भाजपा को चोट पहुंचाएगा।
हस्तिनापुर में रालोद से घोषित प्रत्याशी जिपं सदस्य कुसुम दलित बिरादरी से हैं। उनके पति गुर्जर हैं। ऐसे में रालोद यहां पर दलित-गुर्जर वोट में सेंधमारी के साथ अपने परंपरागत वोट बैंक जाट में भी सेंधमारी के प्रयास में होगा। यहां कहीं न कहीं बसपा और भाजपा प्रभावित होंगी।
दक्षिण सीट पर रालोद ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख पप्पू गुर्जर को चुनाव मैदान में उतारने की बात कही है। गुर्जर बिरादरी में असर रखने वाले पप्पू कहीं न कहीं भाजपा प्रत्याशी को प्रभावित करेंगे। क्योंकि भाजपा से भी यहां से गुर्जर प्रत्याशी के रूप में डॉ. सोमेंद्र तोमर मैदान में हैं।

सिवाल और सरधना में भी लड़ेगी रालोद
रालोद का फिलहाल सिवालखास और सरधना पर लड़ना तय है। सिवालखास से रालोद जाट प्रत्याशी को उतारती है तो वह सीधे भाजपा को प्रभावित करेगा। सरधना में यदि मुस्लिम पर दांव खेला तो रालोद प्रत्याशी बसपा और सपा दोनों को नुकसान देगा और जाट प्रत्याशी भाजपा का वोट बैंक प्रभावित करेगा।

बिजनौर में रोचक हुए समीकरण
रालोद ने बिजनौर जिले की आठ विस सीटों में से चार पर पत्ते खोलते हुए चांदपुर सीट पर पूर्व कमिश्नर एसके वर्मा व नजीबाबाद सीट पर धामपुर की पूर्व चेयरपर्सन लीना सिंघल पर दांव खेला है। दोनों नेता भाजपा से टिकट मांग रहे थे। वहीं, बिजनौर सीट पर राहुल सिंह व नहटौर से चंद्रपाल वाल्मीकि प्रत्याशी बने हैं। हालांकि अभी नूरपुर, धामपुर, नगीना व बढ़ापुर सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। रालोद नेता बाकी सीटों पर प्रत्याशी उतारने के लिए दूसरी पार्टियों के जिले के दमदार नेताओं पर डोरे डाल रहे हैं। भाजपा के दलबदलू चुनावी मैदान में उतरकर कई सीटों पर भाजपा का खेल बिगाड़ सकते हैं। इसे लेकर भाजपा भी चौकस होने लगी है।

बागपत में बिगड़ेगा समीकरण
महागठबंधन का गणित बिगड़ जाने के बाद बागपत में रालोद अकेले चुनाव लड़ेगा। ऐसे में तीनों सीटों पर अन्य दलों का समीकरण बिगड़ेगा। खुद रालोद को भी गुणा-भाग करना पड़ेगा। रालोद का गढ़ रही छपरौली सीट पर रालोद, बसपा, भाजपा, सपा के बीच कांटे की टक्कर होगी। अभी कांग्रेस ने यहां प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। सपा-रालोद का गठबंधन नहीं होने के कारण बड़ौत सीट पर सपा के प्रत्याशी भी मैदान में उतर गए हैं। ऐसे यहां भी समीकरण बदलेंगे। बागपत सीट पर भी कांग्रेस और सपा ने प्रत्याशी उतार दिए हैं। ऐसे में यहां वोटों का बंटवारा तय है। पिछला चुनाव रालोद-कांग्रेस ने साथ मिलकर लड़ा था। लेकिन इस बार दोनों अलग-अलग मैदान में हैं।
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