बेगमपुल के इलेक्ट्राविला अपार्टमेंट फ्लैट नंबर 32 की डोरबेल बजती है, बिहार से कुछ दिन पहले आई प्रतिमा ने दरवाजा खोला। सामने फ्लैट नंबर 22 की रूपा खड़ी थी। बिना कुछ कहे रूपा सीधे किचन में गई और दो आलू उठा लिए। लौटे हुए कहा कि अरे बेटे को फिंगर चिप्स खाने हैं, आलू थे नहीं तो लेने चली आई। प्रतिमा बोली अरे रुक, यहीं पर बना ले, हम भी खा लेंगे।
बस फिर क्या था किचन दोस्ती की खुशबू से महकने लगी। रुपा और प्रतिमा में न तो रिश्तेदारी है, न स्कूल, कॉलेज की सहेली हैं। बस एक अपार्टमेंट में रहते हुए दोनों की दोस्ती हुई और अब एक परिवार की तरह रहती हैं। अपार्टमेंट कल्चर में अब संयुक्त परिवार जैसा प्यार घुलने लगा है। पहले लोग खून के रिश्ते को ही परिवार मानते थे, लेकिन समय के साथ धारणा बदल रही है। प्यार और विश्वास ने परायों को भी अपना बना दिया है। लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ देते हैं। अगर पति किसी काम से बाहर जाए तो पत्नी को परेशानी नहीं होती है। पड़ोसी महिलाएं उसका पूरा ख्याल रखती हैं।
अम्माजी की गली बनी फैमिली
गंगानगर में बनी भागीरथी कुंज कॉलोनी ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ सीरियल की याद दिलाती है। यहां 30 परिवार रहते हैं। किसी भी परिवार में कोई मनमुटाव नहीं। शाम को महिलाएं बाहर बैठकर एक साथ चाय पीती हैं। जेंट्स भी मॉर्निंग वॉक पर मिलते हैं। करेले के जूस से लेकर बच्चों की आइसक्रीम भी यहां सेलिब्रेशन का हिस्सा होती है। कालोनी में रहने वाले विशाल कहते हैं, हमारी कालोनी में मकान खरीदने के लिए लोग आए दिन पूछने आते हैं, लेकिन यहां मकान खाली ही नहीं रहता। बिजनेस मैन, आर्मी पर्सन, मार्केटिंग जॉब के लोग सभी यहां रहते हैं। दिन में जेंट्स घर पर न हों, लेकिन सुरक्षा की परेशानी नहीं होती। किसी के घर मम्मी आ जाएं तो वो पूरी कालोनी की मम्मी और दादी होती हैं। हर त्योहार मिलकर मनाते हैं।
दोस्त मिले बना पूरा परिवार
साकेत निवासी दिनेश गुप्ता ने दोस्तों के साथ मिलकर एक ज्वाइंट फैमिली बना ली। दिनेश की पत्नी शालिनी गुप्ता बताती हैं, हम लोग पहले बलवंत नगर में ज्वाइंट फैमिली में रहते थे। परिवार बड़ा तो घर छोटा पड़ने लगा। नया घर बनाकर रहने में बड़ी परेशानी परिवार के छूटने की थी। मेरे हसबैंड के फ्रैंड्स ने योजना बनाई कि ऐसे रहें जिसमें प्राइवेसी भी बनी रही और एक-दूसरे के सुख-दुख में काम आ सकें। सभी ने मिलकर एक जमीन खरीदकर उसमें पांच परिवारों के लिए पांच अपार्टमेंट सेम पैटर्न पर बनवा लिए। इंटीरियर सभी ने अपने अनुसार कराया, लेकिन लिफ्ट, सिक्योरिटी, पानी, बिजली, पार्किंग, गार्ड की सुविधाएं कॉमन हैं। इस अपार्टमेंट में शालिनी और दिनेश गुप्ता के साथ अजय व पूनम बंसल, संजय व सोनल गोयल, संजीव व अंजली शर्मा एवं अजय व शिल्पा गर्ग का परिवार रहता है। पांचों परिवार रोजाना शाम को एक साथ चाय पीते हैं। एक-दूसरे परिवारों के बच्चों की पसंद-नापसंद, सुरक्षा का ख्याल सोसाइटी के सभी लोग रखते हैं। सोनल कहती हैं एक-दूसरे की प्राइवेसी भी खत्म नहीं होती और सब साथ भी रहते हैं।
हर किसी को साथ की जरूरत
बाईपास स्थित शीलकुं ज कॉलोनी का माहौल भी एक परिवार की तरह है। ऋचा बताती हैं, पिछले साल ही इस कालोनी में रहने आई। हाईफाई मकान देखकर लगा कि यहां अकेलापन खा जाएगा। लेकिन दो दिन बाद जब कॉलोनी की सारी महिलाएं मुझसे मिलने आई तो लगा जैसे पुरानी सहेली मिल गई हों। ऋचा कहती हैं हर किसी को साथ की जरूरत होती है। कॉलोनी में कई आंटी, अंकल अकेले रहते हैं। उनका ख्याल हम लोग रखते हैं। हमारे बच्चों को वो लोग लुकऑफ्टर करते हैं। एक लेडी के हसबैंड नेवी में हैं, उसको डिलेवरी होनी थी, लेकिन घर में कोई नहीं था, फिर कालोनी के हम लोग मिलकर उन्हें अस्पताल ले गए उनकी पूरी देखभाल की। दीवाली, करवाचौथ एक साथ मनाते हैं।
परिवार से दूर, परिवार का साथ
इलेक्ट्राविला अपार्टमेंट बेगमपुल में रहने वाली प्रतिमा सिंह बिहार से हैं। वे कहती हैं, पति की जॉब मेरठ में है, इसलिए यहां आना पड़ा। परिवार की याद आती है, लेकिन पड़ोसी इतने अच्छे मिल गए हैं कि अब सब कुछ ठीक लगता है। प्रतिमा, रूपा और अशोक लता यादव तीनों का परिवार मिलकर रहता है। प्रतिमा क हती हैं इमरजेंसी में बच्चों को छोड़कर जाना हो तो उनके खाने-पीने या सेफ्टी की दिक्कत नहीं रहती है।
अकेलेपन से आया बदलाव
शहर में साकेत जैसे पॉश इलाके में लोग अपने एकाकीपन को दूर करने के लिए बड़ी कोठियों को फ्लैट और अपार्टमेंट के रूप में विकसित कर रहे हैं, ताकि बच्चों के जाने के बाद अभिभावक खुद को अकेला न महसूस करें। बच्चों को बड़ों का प्यार और संस्कार भी मिलता रहे। बंद कालोनियों, बहुमंजिला इमारतों में बच्चों को बुजुर्गों का और बुजुर्गों को बच्चों का प्यार देने की नई परंपरा जन्म ले रही है।
ये हैं संयुक्त परिवार
एक घर में 21 सदस्य
जैना ज्वैलर्स के संचालक अंकुर जैन का पूरा परिवार रेलवे रोड में एक साथ रहता है। परिवार में 21 सदस्य हैं। सबका खाना एक साथ बनता है। परिवार में नवीन जैन, सुनीता जैन, रोहित, नवीन, सपना, सांची, अतिशय, अंकुर जैन, अंजली, वंश, ओजस जैन, अतुल जैन, सारिका जैन, वरुण, निधि, वरदान, रिद्दी जैन, वर्धमान, श्रद्धा, समय व खत्री जैन हैं।
लोगों को देते अयोध्या की प्रेरणा
मीरा एंक्लेव निवासी नरेंद्र कुमार गोयल का परिवार लोगों को अयोध्या की याद दिलाता है। नरेंद्र कुमार गोयल के चार बेटों का पूरा परिवार साथ रहता है। एक साथ काम, खाना पीना सभी इस घर की परंपरा है। परिवार में नरेंद्र कुमार गोयल, मीरा गोयल, सुरेंद्र कुमार, रश्मि, राजीव, सविता, संजीव, रुचि गोयल, अमित, आशा, सचिन, मीनू, शशांक, अर्पणा, आयुष, अंकुश, रिषभ, अमन, रितिक, अमीषा, सांची, सुमित, कृष्णा और श्रेया गोयल कुल 24 लोग साथ रहते हैं।
घूमने साथ जाता है परिवार
ठठेर वाड़ा निवासी राजकुमार बंसल का पूरा परिवार एक साथ रहने में भरोसा रखता है। परिवार में 21 लोग साथ रहते हैं। इसमें रामकिशन दास बंसल, शिवकुमारी, राजकुमार बंसल, मधु, महेश, मंजू, हिमांशु, हार्दिक, रितु, वंश, शोभित, शालू, तान्वी, सान्वी, जीत, निशू, केशव, राघव, विपुल, आशा, चारु बसंल सभी एक साथ रहते हैं। पूरा परिवार घूमने भी साथ ही जाता है।
काम और रहना साथ-साथ
बंसल ट्रेडर्स के संचालक सदर निवासी रामकिशन दास बंसल के परिवार में एक और एक ग्यारह नहीं बल्कि इक्कीस का सूत्र लागू है। बंसल परिवार में शिमला देवी, हरीश बंसल, कविता, अनिल, अंजू, राकेश, पूनम, सुमित, शिवांगी, लवित, अमित, अक्षय, नमित, उज्जवल, आयुष बंसल सभी एक साथ रहते हैं। व्यापार भी साथ करते हैं। खाना पीना और दुकानें एक साथ हैं।