पीवीवीएनएल शहर से निकलने वाले कचरे से बनी बिजली खरीदेगा। मंगलवार को ऊर्जा भवन में बिजली बनाने वाली फर्म और पीवीवीएनएल के बीच पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) हो गया। शुरुआती चरण में फर्म पीवीवीएनएल को एक मेगावाट बिजली बेचेगी। बाद में इसे पांच मेगावाट तक बढ़ाया जाएगा।
कूड़े से बिजली तैयार करने के लिए दिल्ली रोड पर भूड़बराल के पास बिजेंद्रा एनर्जी एंड रिसर्च नाम की फर्म स्थापित की गई है। यह फर्म कूड़े से अलग किए जाने वाले आरडीएफ के पैलेट से एक मेगावाट बिजली तैयार करेगी। मंगलवार को पीपीए में फर्म की तरफ से बिजेंद्र चौधरी और पीवीवीएनएल की तरफ से मुख्य अभियंता वाणिज्य संजय आनंद जैन ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर मौजूद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि कचरे का निस्तारण करने से एक साल में 7000 रुपये प्रति घर इलाज के बचेंगे। फर्म चेयरमैन बिजेंद्र चौधरी ने बताया कि नगर निगम से 200 टन कूड़ा प्रतिदिन का करार हुआ है। फिलहाल 20 से 30 टन कूडे़ से एक मेगावाट बिजली बनाई जाएगी। निगम से 500 रुपये प्रति टन कूड़ा खरीदा जाएगा।
पीपीए पर आनाकानी करते रहे अधिकारी
पीवीवीएनएल ने शासन के दिशा निर्देश और उप्र विद्युत नियामक आयोग के तय प्रावधानों के अनुसार पीपीए करने पर सहमति दे दी थी, लेकिन मंगलवार को जब पीपीए फाइल पर हस्ताक्षर करने का समय आया तो अधिकारी पल्ला झाड़ने लगे। इस पर पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि अगर पीपीए से किसी भी अधिकारी को भविष्य में परेशानी हुई तो वे उनके साथ खड़े होंगे।