मेरठ। पूर्वांचल में बारिश होने से बिजली की मांग में कमी आई है। वहां के हिस्से की बिजली भी पश्चिमांचल को दी जा रही है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली नहीं मिल पा रही है। पावर सिस्टम को बचाने, फॉल्ट व मेंटेनेंस के नाम पर शहर से लेकर गांव तक जमकर बिजली कटौती की जा रही है। वहीं, ट्रांसमिशन अधिकारियों का कहना है कि उनके स्तर से पूरी बिजली वितरण के लिए दी जा रही है। पश्चिमांचल में मानसूनी बारिश नहीं होने से अभी बिजली की भारी मांग बनी हुई है। वहीं, पूर्वांचल में हो रही बारिश के चलते बिजली की मांग में काफी कमी आई है। अब वहां के हिस्से की बिजली भी पश्चिमांचल की कमी को पूरा करने के लिए दी जा रही है। हालांकि इसका फायदा उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रहा है। भीषण गर्मी में जमकर बिजली कटौती की जा रही है।
जितनी मांग उतनी मिल रही बिजली
पश्चिमांचल के 14 जिलों में करीब 6500 मेगावाट बिजली की मांग चल रही है। मांग के सापेक्ष बिजली भी मिल रही है। यानी मांग और उपलब्धता में कोई अंतर नहीं आ रहा है। ट्रांसमिशन से मिली जानकारी अनुसार कंट्रोल से प्राप्त बिजली 33 केवी बिजलीघरों को मुहैया कराई जा रही है। डिस्ट्रीब्यूशन स्तर से ही पूरी बिजली उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रही है।
फाल्ट और मेंटिनेंस के नाम पर कट
फाल्ट और मेंटिनेंस के नाम पर बिजली के झटके बड़ी होशियारी के साथ दिए जा रहे हैं। बिजलीघर से आपूर्ति तो शेड्यूल अनुसार ही दिखाई जा रही है। वहीं, फीडरवार समय-समय पर बिजली कटती रहती है। दिन के साथ रात को भी कई-कई बार बिजली कट रही है।
क्या बोले अधिकारी
ट्रांसमिशन से मिलने वाली बिजली हर हाल में उपभोक्ताओं तक पहुंचाई जा रही है। आंधी एवं बारिश में होने वाले फाल्ट और लाइन तथा पोल की मेंटिनेंस आदि के चलते ही बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है।-एसबी यादव, मुख्य अभियंता मेरठ जोन