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15 अप्रैल से सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद का आदेश, तैयारी अधूरी

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15 अप्रैल से सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर खरीद का आदेश, तैयारी अधूरी
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मेरठ। गेहूं की फसल की कटाई तेजी से चल रही है। किसान आर्थिक तंगी के चलते अपने गेहूं को भेजकर अनेक कार्यों की पूर्ति करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने किसानों के दर्द को समझते हुए 15 अप्रैल से गेहूं क्रय केंद्रों पर खरीदने का आदेश दिया है। आरएफसी विभाग ने भी जनपद ही नहीं बल्कि पूरे मंडल के सभी जनपदों में गेहूं क्रय केंद्र खोलने की फाइल तैयार कर ली है। 15 अप्रैल से गेहूं क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद करने का दावा भी किया जा रहा है। अगर धरातल की स्थिति को जाने दो विभाग की क्रय केंद्र खोलने की कार्रवाई अभी आधी अधूरी है।
आरएफसी विभाग से मिले रिकॉर्ड के अनुसार मंडल के मेरठ बुलंदशहर गौतमबुद्धनगर गाजियाबाद हापुड़ और बागपत में जगह-जगह पर यानी 208 स्थानों पर गेहूं क्रय केंद्र खोले जाने हैं। अगर मेरठ जनपद की बात करें तो खंड विकास खरखौदा सरधना मवाना मेरठ किला परीक्षितगढ़ हसनपुर, जानी रजपुरा माजरा रोहटा क्षेत्रों में 30 स्थानों पर गेहूं क्रय केंद्र खोले जाएंगे। जिनमें चार गेहूं क्रय केंद्र खाद्य विभाग के होंगे साथ ही 19 सीसीएफ 2 भारतीय खाद्य निगम चार यूपीएसएस और एक यूपी स्टेट एग्रो विभाग संचालित करेगा।
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खाते में होगा किसानों को भुगतान
आरएफसी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर किसान से 1925 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा जाएगा। किसानों को उनके गेहूं का भुगतान सीधे उनके खाते में किया जाएगा। गेहूं क्रय केंद्र पर आने वाले किसान को पीने का पानी आदि दिए जाने की सुविधा के भी आदेश किए गए हैं।
प्रचार-प्रसार नहीं
गेहूं क्रय केंद्रों पर किसान को क्या सुविधाएं मिलेंगी और उनके गेहूं का रेट क्या होगा इस संबंध में जिला प्रशासन की तरफ से अभी तक किसी भी स्थान पर प्रचार-प्रसार सामग्री नहीं लगाई गई है।
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बता दें कि शासनादेश के मुताबिक ऐसे स्थान जैसे मंडी जहां पर किसानों का अधिक आना जाना हो या फिर ब्लॉक मुख्यालय तथा कुछ गांव में प्रचार-प्रसार सामग्री लगानी होती है। लेकिन अभी तक कहीं पर भी कोई प्रचार नहीं दिख रहा है। माना जाता है कि सरकारी प्रचार प्रसार की कमी के कारण किसान अपना गेहूं सरकारी क्रय केंद्र पर ले जाने की वजह कुछ जमाखोरों को ही सस्ते रेट में बेचने को मजबूर हो जाते हैं। इस संबंध में आरएफसी एके पांडे से कई बार फोन पर बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्हें फोन नहीं उठाया। मैसेज भेजने के बाद भी उन्होंने जानकारी देना गंवारा नहीं समझा।
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