पुराने नोट बदलने से वंचित लोग अब विदेशी टूर पर गए मित्रों और रिश्तेदारों के साथ एनआरआई को तलाश रहे हैं। आरबीआई की गाइड लाइन के अनुसार नोटबंदी के दौरान विदेशी टूर पर गए लोगों को यह सुविधा दी गयी है। इस नियम का फायदा उठाकर दलाल भी सक्रिय हो गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की रात पुराने पांच सौ और एक हजार के नोटों का चलन बंद कर दिया था। इसके बाद इन रुपयों को बदलने और बैंक में जमा करने की समयसीमा निर्धारित कर दी थी। जिसमें नोट बदलने के लिए 24 नवंबर तक का समय दिया गया था, तो बैंक में जमा कराने के लिए 30 दिसंबर अंतिम तिथि तय की गयी थी। इस दौरान तमाम लोगों ने बैंकों में नोट बदलने के साथ ही जमा भी किए।
लेकिन अभी भी कुछ लोग ऐसे रह गये हैं, जिनके पास पुराने नोट मौजूद हैं। ऐसे लोगों में जिनके पास पुराने नोट 10-20 हजार रुपये तक हैं, वह तो चुप्पी साधे बैठे हैं। लेकिन कुछ लोगों के पास अभी भी पांच से बीस लाख रुपये तक पुराने नोट बचे हैं। ऐसे लोगों को अब विदेशी टूर पर जाने वाले या एनआरआई के सहारे की जरूरत पड़ रही है।
कारण अलग-अलग
इस समय जिन लोगों के पास पुराने नोट मौजूद हैं, वह अजीब मुसीबत में है। किसी ने जब अब लॉकर ऑपरेट किया तो उसमें लाखों रुपये की नगदी पुराने नोट के रूप में मिली। उस दौरान उन्होंने डर के कारण लॉकर ऑपरेट नहीं किया कि कहीं आयकर विभाग की नजर में न आ जाएं। वहीं, कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने कर्ज दे रखा था और कर्जदार नोट बंदी के बाद नोट बदलने की समय सीमा बीत जाने के बाद कर्जदार को पुराने नोट थमाकर अपना कर्ज चुकता कर गया।
ये है आरबीआई की गाइड लाइन
आरबीआई ने ऐसे लोगों को जो नोट बंदी के दौरान विदेशी टूर पर थे और निर्धारित समय सीमा के भीतर वापस लौटकर नहीं आ सके। या फिर ऐसे लोग जो एनआरआई हैं और उस समय किन्हीं कारणों से अपने नोट नहीं बदल सके, उनके लिए 31 मार्च तक घोषणा पत्र के साथ नोट जमा करने की सुविधा दी है। ये लोग घोषणा पत्र के साथ अपने विदेश में रहने के तमाम साक्ष्याें सहित उक्त धन अपने खाते में जमा कर सकते हैं।
दलाल हो गए सक्रिय
आरबीआई की गाइड लाइन का फायदा उठाते हुए दलाल सक्रिय हो गए हैं। इन दलालों के विदेशी टूर से लौटने वाले और एनआरआई से संपर्क हैं। ऐसे में ये लोग कुल पुराने नोट के बदले आधे का भुगतान करने की शर्त पर नोट बदलवा रहे हैं। ऐसे कई दलालों का संपर्क दिल्ली और पंजाब के बड़े दलालों से हैं। क्योंकि यह काम सबसे ज्यादा आसपास में दिल्ली और पंजाब में चल रहा है।