प्रदर्शनकारियों ने सीएए, एनआरसी, एनपीआर को काला कानून बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। इस दौरान काफी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग हाथ में तिरंगे लिए और सीएए, एनआरसी, विरोधी नारे लिखी तख्तियां लेकर ईदगाह मैदान पर पहुंचे। इस अवसर पर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने का संकल्प भी लिया गया। अंत में मुल्क में अमन चैन के लिए दुआ भी कराई गई।
धरने को मौलाना हकीमुद्दीन, जमीयत के जिलाध्यक्ष मौलाना जहूर अहमद, जहीन अहमद, मौलाना शमशीर कासमी (सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी जमीयत) मुफ्ती खालिद सैफुल्लाह, कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक इमरान मसूद, मौलाना अकील, छात्र नेता फवाद आलम, मौलाना तय्यब, कारी शौकीन, मौलाना मुशर्रफ, मौलाना मुस्तकीम, मौलाना अल्ताफ, मौलाना अब्दुल खालिक, मुफ्ती उमेर, मौलाना वसीम, कार्यकारी चेयरमैन नोमान मसूद, चौ मजाहिर राणा, मौलाना आरिफ, मौलाना, फुरकान कारी मुस्तफा आदि ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता मौलाना जहुर कासमी संचालन मौलाना महमूद उर रहमान ने किया। कार्यक्रम संयोजक मौलाना इरफान रशीदी ने सभी का आभार व्यक्त किया। धरना प्रदर्शन को लेकर प्रशासन भी चुस्त-दुरुस्त रही। सीओ अजेय शर्मा ने बताया कि धरने पर बैठे तीन सौ लोगों ने सीएए के विरोध में गिरफ्तारी दी थी, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया।
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