मेरठ विकास प्राधिकरण में मूल आवंटी अपने भूखंड पर आवास बनाने का सपना ही संजोता रहा और एमडीए के बाबुओं ने एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर उसके नाम फर्जी रजिस्ट्री कर दी। फर्जीवाड़े की पराकाष्ठा यह रही कि इसमें संपत्ति अधिकारी का फोटो लगाकर फर्जी साइन कर दिए गए। भंडाफोड़ होने पर अब एमडीए ने खरीददार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
यह है प्रकरण
मेरठ विकास प्राधिकरण की शताब्दीनगर योजना के सेक्टर पांच स्थित भूखंड संख्या ए 69 को एमडीए ने स्थानीय निवासी विकास गोयल के नाम करीब दस साल पहले आवंटित किया था। इसकी किश्तें चलती रहीं और मई 2016 में एमडीए ने उनके नाम इसकी रजिस्ट्री भी कर दी। ढाई सौ मीटर का यह प्लाट खाली ही पड़ा था और विकास इस पर आवास बनाने की सोच रहे थे। उन्होंने जब तैयारी की तो वहां दूसरे दावेदार खड़े हो गए। पता चला कि इस भूखंड की रजिस्ट्री तो एमडीए ने किसी पुष्पेंद्र जैन के नाम की है।
शिकायत की तो खुलता गया खेल
विकास ने बीस अक्तूबर 2016 को इस बाबत एमडीए में शिकायत करते हुए कहा कि वहां तो कोई और व्यक्ति दावा कर रहा है। उसके नाम रजिस्ट्री भी की जा चुकी है। जांच में सामने आया कि इस भूखंड का मूल आवंटी किसी धर्मवती को शो किया गया। उन्होंने अपना मुख्तारेआम सदर निवासी पुष्पेंद्र जैन को बनाया और एमडीए ने पुष्पेंद्र जैन के नाम मई 2015 में रजिस्ट्री कर दी। एमडीए ने अपना रिकॉर्ड खंगाला तो पाया कि धर्मवती नाम से कोई आवंटन नहीं किया गया। आवंटन तो विकास गोयल के नाम था। ऐसे में रजिस्ट्री विभाग से फाइल निकलवाई गई तो पाया कि संपत्ति अधिकारी पीएस मिश्रा का फोटो लगाकर फर्जी साइन किए गए थे और पुष्पेंद्र के नाम रजिस्ट्री कर दी गई।
बाबुओं ने खेला खेल
दरअसल, एमडीए जब किसी संपत्ति की रजिस्ट्री आवंटी को करता है तो रजिस्ट्री का अधिकार संपत्ति अधिकारी को होता है। संपत्ति अधिकारी पत्रावली पर फोटो तथा साइन कर संबंधित लिपिक को देते हैं जिससे रजिस्ट्री विभाग में रजिस्ट्री हो जाती है। इसी का एमडीए में फायदा उठाया गया।
बाबू बोले, मैंने नहीं उसने कराया
यह खेल कैसे हुआ, इसके लिए जब एमडीए अफसरों ने संबंधित लिपिकों से पूछताछ की तो उन्होंने एक-दूसरे के पाले में गेंद डाली। संबंधित लिपिक शिवगोपाल वाजपेयी से पूछा कि यह रजिस्ट्री कैसे हुई तो उन्होंने बताया कि वह किसी दूसरे काम से रजिस्टी ऑफिस में गए थे। एमडीए में तैनात एक लिपिक सुनील कुमार प्रथम उनके पास पहुंचे और फाइल देकर कहा कि यह रजिस्ट्री साहब ने भेजी है। इसे भी करा दो। पुष्पेंद्र जैन वहां पहले ही थे। फाइल पर संपत्ति अधिकारी के फोटो तथा साइन थे। ऐसे में उन्होंने रजिस्ट्री करा दी। अब यह पटल महकार लिपिक संभाल रहे हैं। उन्होंने रिकॉर्ड चेक किया। बताया धर्मवती के नाम के आवंटन की कोई पत्रावली नहीं है। रजिस्ट्री रिकॉर्ड लिपिक भरतराम ने बताया कि मई 2016 या डेढ़ साल पहले तक धर्मवती का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इन्हीं सभी बयानों का जिक्र रिपोर्ट में भी किया गया है।
मुकदमा हुआ दर्ज
इस बाबत संपत्ति अधिकारी ने थाना सिविल लाइन में पुष्पेंद्र जैन के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित फर्जी अभिलेख तैयार करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। वीसी एमडीए योगेंद्र यादव ने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच सचिव अवनीश कुमार शर्मा को सौंपी है। उधर पुष्पेंद्र ने भी एमडीए में अपना जवाब दिया था कि जैसे ही उसे पता चला कि फर्जीवाडे़ से रजिस्ट्री उनके नाम की गई तो उन्होंने रजिस्ट्री निरस्त कराने की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी थी।