मेरठ। सीसीएसयू कैंपस और कॉलेजों में फाइनल ईयर के अलावा प्रथम-द्वितीय वर्ष-सेमेस्टरों में पढ़ने वाले 4.25 लाख छात्र-छात्राओं की प्रोन्नति को हरी झडी मिल गई है। बृहस्पतिवार को कार्य परिषद की बैठक में इस पर मुहर लगा दी गई है। इसके साथ ही 222 सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की एक साल के लिए अस्थाई संबद्घता विस्तार की फाइल शासन को भेजी जाएगी, जो भी निर्णय शासन लेगा उसी के आधार पर इनकी संबद्घता का विस्तार होगा। एमबीबीएस प्रकरण में यूएफएम श्रेणी के छात्रों का रिजल्ट जारी किए जाने के मामले में जांच समिति का गठन किया गया है। कोरोना महामारी के बाद दर्जनों कॉलेजों की तरफ से तमाम कोर्सों को बंद कराने के आवेदनों पर भी मुहर लगा दी गई है।
कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार दोपहर कार्य परिषद की बैठक हुई। बैठक में यूजी में प्रथम-द्वितीय वर्ष एवं पीजी में द्वितीय सेमेस्टर कोर्सों की जो परीक्षाएं 18 मार्च के बाद से नहीं हुईं हैं, उन कोर्सों में प्रोन्नति पर निर्णय लिया गया। तय किया गया कि 18 मार्च से पहले तक कॉलेजों में 30 फीसदी परीक्षाएं पूरी हो चुकी थीं। इनमें यूजी-पीजी में आठ लाख कॉपियों-ओएमआर का मूल्यांकन हो चुका है। ऐसे में सबसे पहले इन सभी परीक्षाओं के नंबर जोड़े जाएंगे। जो परीक्षाएं नहीं हुई हैं सिर्फ उनमें ही औसत अंक दिए जाएं। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि जो छात्र-छात्राएं इन परीक्षाओं में फेल हो जाएंगे, वह फेल ही माने जाएंगे।
इस तरह मिलेंगे नंबर
प्रोन्नति का फॉर्मूला शासन की गाइड लाइन के मुताबिक रखा गया है। परीक्षाओं के नंबर के बाद जितने विषय बचेंगे उसमें प्रथम वर्ष वालों को पास होने पर प्रमोट कर दिया जाएगा, लेकिन प्रोन्नति वाले विषयों में उनको नंबर अगले साल द्वितीय वर्ष के पासिंग प्रतिशत के मुताबिक मिलेंगे। द्वितीय वर्ष के छात्रों को प्रथम वर्ष के नंबरों के औसत अंक मिलेंगे। पीजी प्राइवेट में प्रथम वर्ष के छात्रों को द्वितीय वर्ष में प्रोन्नत कर दिया जाएगा, लेकिन उनके नंबर द्वितीय वर्ष का रिजल्ट जारी होने के बाद अगले साल ही मिलेंगे। वार्षिक की तरह सेमेस्टर कोर्सों में भी इसी तरह से प्रोन्नति होगी। द्वितीय सेमेस्टर वालों को प्रथम सेमेस्टर के अंकों के आधार पर नंबर मिलेंगे। चतुर्थ सेमेस्टर वालों को पहले सेमेस्टरों के औसत अंक मिलेंगे।
कई जगहों पर जहां पर तीन-चार-पांच वर्षीय पाठ्यक्रम संचालित हैं, उनके प्रथम व अंतिम वर्ष को छोड़कर बाकी में द्वितीय-चतुर्थ सेमेस्टर के ऐसे छात्रों को तीन वर्ष-पंचम सेमेस्टर में प्रोन्नत किए जाएंगे। ऐसे छात्रों के प्रथम वर्ष (2019) प्रथम तृतीय (सभी तीन) सेमेस्टर के सभी विषयों के प्राप्तांकों का औसत अंक उनके द्वितीय वर्ष (2020) चतुर्थ सेमेस्टर (2020) के उन अवशेष विषयों-प्रश्नपत्रों का प्राप्तांक माना जाएगा। जिसमें 2020 में परीक्षाएं संपादित नहीं हो सकी थी। जिन पाठ्यक्रम की अवधि तीन वर्ष-छह सेमेस्टर से अधिक हो उनमें भी इसी व्यवस्था के आधार पर विवि के स्तर पर आंकलन कर प्रोन्नत किया जाएगा। किसी कारणवश यदि कोई छात्र अंतिम सेमेस्टर-अंतिम वर्ष की परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पाता है तो उस कोर्स-प्रश्नपत्र की विशेष परीक्षा में (कालबाधित न होने की दशा में) सम्मिलित होने का मौका दिया जाएगा। जो विवि की सुविधा के अनुसार आयोजित की जाएगी। ये प्रावधान चालू शैक्षणिक सत्र 2019-20 के लिए केवल एक बार लागू होगा।
ये भी हुए अहम निर्णय
एमबीबीएस प्रकरण में यूएफएम के बावजूद छात्रों का रिजल्ट जारी करने वाले चारों सस्पेंड कर्मचारियों की जांच को चार सदस्यीय समिति का गठन।
सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में कार्यरत शिक्षकों को अब असिस्टेंट प्रोफेसर एवं सहयुक्त प्रोफेसर पद नाम से जाना जाएगा।
एससीआरआईईटी में कार्यरत सीनियर ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर डॉ. एसएन मिश्रा को अनुशासनहीनता और पूर्व में की गई सेवाओं के तथ्यों को छिपाने पर उनकी सेवाएं समाप्त की गईं।
280 से अधिक महाविद्यालयों-संस्थानों के संबद्धता के संबंध में शासन को पत्र भेजा जाएगा। शासन द्वारा जो निर्णय लिया जाएगा उसके आधार पर संबद्धता दी जाएगी।
जो कॉलेज पहली बार संबद्धता के लिए प्रार्थना पत्र देंगे, उनमें खासतौर से नर्सिंग कॉलेज पर यदि इंडियन काउंसिल से संबद्धता नहीं होगी, उसको संबद्धता नहीं दी जाएगी। इसके बावजूद यदि कोई ऐसा कॉलेज छात्रों के एडमिशन कर लेता है तो उस पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।
बैठक में ये रहे मौजूद
प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, कुलसचिव धीरेंद्र कुमार वर्मा, वित्त अधिकारी सुशील गुप्ता, परीक्षा नियंत्रक प्रो. रूप नारायण, डॉ. दर्शनलाल अरोड़ा, प्रो. बीरपाल सिंह, प्रो. आलोक कुमार, प्रो. एवी कौर, डॉ. ईश्वर, डॉ. सीमा जैन, डॉ. रेखा तिवारी, डॉ. एसएस बेदार, डॉ. सुधीर कुमार, डॉ. चमन लाल, डॉ. एचपी सिंह एवं प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता मौजूद रहे।
ये होंगे प्रोन्नत
वार्षिक प्रणाली ::
यूजी बीए-बीएससी-बीकॉम द्वितीय छात्र-छात्राएं -- 145000
यूजी बीए-बीएससी-बीकॉम द्वितीय वर्ष में छात्र -छात्राएं -- 92000
एमए-एमकॉम प्रथम वर्ष प्राइवेट में -- 30500
कुल 267500
सेमेस्टर प्रणाली
यूजी द्वितीय सेमेस्टर में छात्र-छात्राएं- 46 हजार
यूजी चतुर्थ में -- 33 हजार
यूजी छठें सेमेस्टर में - 26 हजार
पीजी द्वितीय सेमेस्टर में छात्र-छात्राएं- 12500
कुल -- 117500
बीएड प्रथम वर्ष - 40 हजार