विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद बसपा में घमासान तेज हो गया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी की समीक्षा बैठक में हुए उनके जबरदस्त विरोध और बखेड़े के बाद यह घमासान अब और तेज होने के आसार हैं। उधर, एमएलसी अतर सिंह राव को इस बखेड़े के बाद देर रात वेस्ट के सभी मंडलों से हटा दिया गया। लेकिन बुधवार सुबह फिर कहा गया कि फिलहाल वे यहां काम करेंगे।
मंगलवार को जिला कार्यालय पर जो हंगामा हुआ, उसने बसपा की गुटबाजी को सड़क पर ला दिया। नसीमुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। अतर सिंह का पुतला फूंका गया। पूर्व विधायक योगेश वर्मा तथा उत्तराखंड प्रभारी प्रशांत गौतम आपस में भिड़ गए। समर्थकों के बीच मारपीट हो गई। शाम को प्रशांत गौतम को पार्टी से बाहर कर दिया गया। यही नहीं, प्रकरण और गंभीर तब हो चला जब देर रात पूर्व सांसद हाजी शाहिद अखलाक को भी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। चुनाव में की गई शिकायत के अलावा उन्हें इस प्रकरण से भी जोड़ा गया जबकि वे मीटिंग में मौजूद नहीं थे।
दो बार बदला फरमान
इस प्रकरण के बाद देर रात बसपा सुप्रीमो मायावती ने नसीमुद्दीन के अलावा अतर सिंह राव आदि सभी को दिल्ली तलब कर लिया था। देर रात ही अतर सिंह राव को मुख्य संगठन से हटाकर मेरठ, मुरादाबाद, बरेली तथा सहारनपुर में मंडल जोन कोऑर्डिनेटर तथा भाईचारा कमेटियाें का प्रभारी बना दिया गया। हालांकि बुधवार सुबह इस फरमान को वापस कर दिया गया और कहा कि वह पहले की तरह ही काम करेंगे।
बगावत कर सकते हैं कार्यकर्ता
कई बसपाई इस स्थिति में बसपा को अलविदा कह सकते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध के दौरान आरोप लगाया था कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने चहेतों तथा अपने पुत्र को जिम्मेदारी देने के अलावा क्या किया? बसपा के दलित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई। इसी के चलते पार्टी का यह हश्र हुआ। ऐसे में अब कुछ पदाधिकारी और कार्यकर्ता बसपा छोड़ने का एलान भी कर सकते हैं।
मानने को तैयार नहीं कार्यकर्ता
बसपा कार्यकर्ता इस समय पूरी तरह से आक्रोशित हैं और किसी भी तरह से मानने को तैयार नहीं है। दरअसल मंगलवार को होने वाली मीटिंग के भी पहले तीन स्थान बदले गए और चौथी जगह पार्टी कार्यालय पर ही बैठक तय हुई। दरअसल, हर बार यही देखा जा रहा था कि कहीं विरोध न हो जाए। रात को ही उन्हें मनाने की भी कोशिश की गई। लेकिन वे नहीं माने और जबरदस्त तरीके से विरोध जताया गया। यह केवल मेरठ में ही नहीं बल्कि कई जगह हुआ। साहिबाबाद में भी नसीमुद्दीन का जमकर विरोध किया गया।
महापौर के चुनाव की रच रहे पटकथा
बसपा यूं तो महापौर आदि के चुनाव में दाव कम आजमाती है। लेकिन माना जा रहा है कि इस बार बसपा महापौर चुनाव में ताल ठोकेगी। मेरठ महापौर की सीट पर इस बार आरक्षण क्रम बदलना है। यदि यह सीट एससी रिजर्व में रह गई तो बसपा के कई दिग्गज ताल ठोकने के चक्कर में हैं। कहा जा रहा है कि इसे लेकर भी पार्टी को जंग का अखाड़ा बनाया जा रहा है।