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रथ पर सवार दिखेंगे रावण और मेघनाथ

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मेरठ। दशहरा नजदीक आते ही रावण के पुतले आकार लेने लगे हैं। रात दिन कारीगर पुतला निर्माण कर रहे हैं। सबसे ऊंचा रावण का पुतला 80 फीट का इस बार छावनी रामलीला का बताया जा रहा है। हालांकि शहर रामलीला और सूरजकुंड रामलीला ग्राउंड का पुतले भी आकर्षक बनाए जाते हैं।
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कंकरखेड़ा और मेरठ छावनी रामलीला समिति के लिए बनाए जा रहे पुतलोें में रावण, मेघनाद और कुंभकरण रथ पर सवार दिखाए जाएंगे। कारीगर असलम और वसीम ने बताया कि कंकरखेड़ा के पुतले में रावण 60 फीट, मेघनाद 55 और कुंभकरण का 50 फीट का पुतला होगा। उधर, दिल्ली रोड रामलीला में रावण का पुतला 70 फीट का होगा। छावनी रामलीला का रावण का पुतला 80 फीट लंबा और 20 फीट चौड़ा होगा। प्रह्लाद नगर, शास्त्रीनगर और मोरीपाड़ा सहित किठौर के लिए पुतले अबरार द्वारा बनाए जा रहे हैं।
एक हजार बांस में बनेंगे तीन पुतले
रावण, मेघनाद और कुंभकरण के तीन पुतले बनने में लगभग एक हजार बांस का प्रयोग किया जाता है। कारीगर असलम ने बताया कि तीन क्विंटल रद्दी कागज की मदद से पुतले को आकार दिया जाता है। छावनी रामलीला में पुतले की आंखें घूमेंगी साथ ही हाथ में चकरी चलेगी। एक पुतला बनाने में लगभग पचास हजार रुपये की लागत आएगी। इसमें बीस हजार रुपये निर्माण में तथा तीस हजार रुपये के पटाखे लगाए जाते हैं।
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यहां होगा रावण का पुतला दहन
मेरठ में सदर भैसाली मैदान, सूरजकुंड पार्क, रजबन फुटबॉल ग्राउंड, दिल्ली रोड रामलीला ग्राउंड, प्रह्लाद नगर, जेलचुंगी, कसेरूखेड़ा, लालकुर्ती, कंकरखेड़ा सहित विभिन्न स्थानों पर पुतला दहन किया जाएगा।
हिंदू मुस्लिम सौहार्द का प्रतीक 1987 की रामलीला
- कर्फ्यू में भी परंपरागत स्थान पर हुई थी रामलीला
मेरठ। 1987 में आयोजित छावनी रामलीला ऐतिहासिक यादों को संजोए है। कर्फ्यू के दौरान हिंदू-मुस्लिम सौहार्द का परिचय देते हुए मुस्लिम कारीगरों ने पुतला निर्माण किया था। उधर, समिति ने बहुत कम समय में तैयारी पूर्ण कर रामलीला मंचन को ऐतिहासिक बनाया था।
अध्यक्ष पवन गर्ग ने बताया कि उनके परिवार की तीन पीढ़ी रामलीला से जुड़ी रहीं। 1987 के दौरान रामलीला ने ही शहर में शांतिपूर्ण माहौल दोबारा कायम किया था। तब शाम पांच बजे मंचन शुरू हो जाता और नौ बजे समाप्त हो जाता था। समिति के महामंत्री गणेश अग्रवाल ने बताया कि उस समय भी परंपरागत स्थान भैसाली ग्राउंड में रामलीला का मंचन हुआ था। मंचन के दौरान भारी संख्या में पुलिस तैनात रही। तब 12 घंटे के लिए कर्फ्यू खोला गया और रावण पुतला दहन किया गया था। रावण के पुतले के निर्माणकर्ता असलम ने बताया कि उनकी बारह लोगों की टीम को तीरगरान से पुलिस की निगरानी में सदर ढोलकी मोहल्ले लाया जाता था, यहां स्थित धर्मशाला में उन्होंने रावण के 60 फीट के विशाल पुतले का निर्माण किया था। पुतले को कई हिस्सों में बनाया गया। हालांकि पुतले को काफी मशक्कत के बाद धर्मशाला से बाहर निकाला गया था।
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