हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक मेरठ के ऐतिहासिक मेले नौचंदी को सरकारी मेला घोषित करने की कवायद शुरू हो गई है। शासन के विशेष सचिव अनिल कुमार वाजपेयी ने मेला नौचंदी को प्रांतीयकृत मेला घोषित करने के संबंध में डीएम को 5 और 14 नवंबर को पत्र लिखे थे।
जिसमें उन्होंने द यूनाइटेड मेलाज प्रोविन्सेस एक्ट 1938 के तहत प्रावधानों के अंतर्गत परीक्षण कर राजकीय मेला घोषित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर 20 नवंबर तक शासन को भेजने के लिए कहा था। कोई कार्यवाही न होने पर अब फिर वाजपेयी ने डीएम को पत्र लिखकर शीघ्र प्रस्ताव मांगा है। इस संबंध में एडीएम सिटी ने जिला पंचायत और नगर निगम से रिपोर्ट मांगी है।
दरअसल इस मेले को नगर निगम और जिला पंचायत हर साल बारी-बारी से आयोजित कराते हैं। ऐसे में मेला परिसर की पूरे साल उचित देखभाल न होने और राजनीति के कारण मेले का स्तर लगातार गिरता चला गया। वहीं, मेला आयोजन स्वायत्त संस्थाओं के करने से जिला प्रशासन भी रुचि नहीं लेता।
ऐसे में पटेल मंडप के कार्यक्रमों का भी स्तर लगातार नीचे गिरा। जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह के अनुसार मैंने मुख्यमंत्री से मेला नौचंदी को सरकारी मेला घोषित करने की मांग की थी। क्योंकि इस मेले की व्यवस्था पर मोटा खर्च आता है। ऐसे में यदि सरकारी मेला घोषित होता है तो सरकार द्वारा मेला आयोजन के लिए बजट आवंटन होगा और मेला परिसर की स्थिति में सुधार होगा।
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