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यूपी: रैपिड रेल आने से पहले चार नए टैक्स लगाने की तैयारी, सफर होगा सुहाना लेकिन जेब पर पड़ेगा भारी

Sun, 16 Jun 2019 03:17 PM IST
Dimple Sirohi दीपक भारद्वाज, अमर उजाला, मेरठ
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रैपिड रेल फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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रैपिड रेल से आपका दिल्ली का सफर सुहाना हो जाएगा, यह तय है। लेकिन प्रोजेक्ट को वित्तीय दिक्कतों से बचाने के लिए आपके ऊपर भी भार पड़ सकता है। शहरवासियों पर ‘वैल्यू कैप्चर फाइनेंस’ प्रणाली के तहत चार प्रकार के टैक्स भार को लगाया जा सकता है। जिससे परियोजना को वित्तीय रुप से आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिल सके।
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इस प्रणाली को अपनाने के लिए नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एनसीआरटीसी) की तरफ से आयोजित कार्यशाला में नीति आयोग, उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकारी सहित कई विशेषज्ञों के साथ चर्चा की गई। 

कई देशों मेें सरकार ‘वैल्यू कैप्चर फाइनेंस’ प्रणाली पर जनता के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तैयार करती हैं। विदेशों में चल रहे रेल नेटवर्क में लंदन की क्रॉसरेल, कोरिया के सबवे सिस्टम पर भी कार्यशाला में चर्चा की गई।
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वहीं, देश के दिल्ली, मुंबई और नागपुर मेट्रो के  मॉडल को भी साझा किया गया। शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से इस प्रणाली को अपनाने के लिए कई राज्यों को बोला गया है। सरकार ने कहा था कि वर्ष 2018-19 में प्रणाली दस लाख से अधिक आबादी वाले शहर में लागू होगी। 

राजस्व बढ़ेगा तो दौड़ेगा प्रोजेक्ट
गाजियाबाद में हुई कार्यशाला में औद्योगिक विकास सचिव संतोष कुमार यादव ने कहा कि ऐसी बड़ी परियोजनाओं के लिए वित्तीय आत्मनिर्भरता जरूरी है। जिससे अन्य विकल्पों से भी प्रोजेक्ट को वित्तीय रुप से मजबूत बनाया जा सके। इसी को ध्यान में रखते हुए ऐसे वित्तपोषण को अपनाना होगा, जिससे राजस्व बढ़ने के साथ परियोजना की स्थिरता भी बनी रहे। वहीं, मंडलायुक्त मेरठ अनीता सी. मेश्राम ने भी इस प्रणाली का समर्थन करते हुए कहा कि ‘वैल्यू कैप्चर फाइनेंस’ प्रणाली पर विचार करना आवश्यक है।  

स्थान एक और परिवहन साधन अनेक
इसके अलावा ट्रांजिट ओरियंटेड डेवलपमेंट के तहत भी शहर का विकास किया जाएगा। रैपिड रेल से सफर करने के बाद आपको वहीं पर ही दूसरे परिवहन साधन भी मुहैया कराए जाने की तैयारी है। जिससे आप अपने वाहन का कम से कम उपयोग कर सकें। इसके लिए एनसीआरटीसी ने कई स्टेशनों पर प्लान भी तैयार किया है। एनसीआरटीसी का लक्ष्य दिल्ली से मेरठ के बीच वाहनों को कम करना है। जिससे आप आसानी से अपने घर और कार्यालय पहुंच सकें।  
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इन करों को लगाया जा सकता है
लैंड वैल्यू टैक्स :  
सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने की वजह से कीमत बढ़ जाने के बावजूद यदि मालिक लंबे समय तक जमीन का उपयोग नहीं करता तो सरकार लैंड वैल्यू टैक्स लगा सकती है।  
इंपैक्ट फीस :  जहां सरकार ने इन्वेस्टमेंट की प्लानिंग की है। उस क्षेत्र में होने वाले नए कंस्ट्रक्शन पर इंपैक्ट फीस लगाई जाएगी। फीस कुल सरकारी इन्वेस्टमेंट और उससे क्षेत्र की भूमि में रुपयों की वृद्धि में होेने वाली बढ़ोत्तरी पर तय की जाएगी।  

फीस फॉर चेंजिंग लैंड यूज :  यदि किसी सरकारी योेजना के शुरू होने के बाद वहां लैंड यूज चेंज होता है। कृषि भूमि को नॉन कृषि भूमि में बदल दिया जाता है तो जमीन मालिक से फीस वसूली की जा सकती है। 
बेटरमेंट चार्ज :   यह चार्ज उन इलाकों में लगाया जाता है, जहां सरकार लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत लोगों से जमीन लेती है और वहां इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करके कुछ हिस्सा वापस दे देती है। इसके बाद सरकार जमीन मालिक से बेटरमेंट चार्ज वसूलती है। 
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