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पीआरडी प्रकरण: फर्जी जवानों से ड्यूटी कराने के मामले दो अधिकारियों की समिति करेगी जांच

Sat, 01 Jun 2019 08:04 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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यूपी पुलिस
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मुजफ्फरनगर जिला युवा कल्याण विभाग में पीआरडी के फर्जी जवानों से ड्यूटी कराने के मामले की जांच दो अधिकारियों की समिति करेगी। सीडीओ अर्चना वर्मा ने मामले की जांच कराने की बात कही है। उधर, दूसरे दिन भी पीआरडी के जवान कार्यालय पर जमे रहे और विभागीय कर्मचारी सूची तैयार करते रहे। इस सूची से ऐसे जवानों के नाम भी नदारद हैं, जो कई वर्षों से ड्यूटी कर रहे हैं।

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जिला युवा कल्याण विभाग में पीआरडी जवानों की तैनाती में हर स्तर पर घालमेल नजर आ रहा है। विभाग के पास पीआरडी जवानों की सूची तक नहीं थी। जब फर्जी जवानों से चुनाव ड्यूटी कराने का मामला उजागर हुआ, तो कर्मचारी आनन-फानन में सूची तैयार करने में जुट गए। शनिवार को दोपहर बाद तक लगभग 1600 नामों की सूची तैयार की गई, लेकिन इस पर आपत्ति आनी शुरू हो गई। कई ऐसे पीआरडी जवान सामने आए, जो कि 1990 और उससे पहले से ड्यूटी कर रहे हैं। उनके पास ट्रेनिंग के प्रमाणपत्र भी हैं, लेकिन उनका नाम इस सूची में शामिल नहीं है।

चरथावल ब्लॉक के गांव रुकनपुर के धर्मेंद्र के पास 1995-96 का ट्रेनिंग सर्टिफिकेट है। वह तभी से ड्यूटी भी कर रहे हैं, लेकिन उनका नाम सूची में नहीं। जानसठ ब्लॉक के गांव नगला निवासी प्रेम कुमार 1986 से ड्यूटी करने की बात कह रहे हैं। उनका नाम भी नदारद है। ऐसे और भी प्रकरण सामने आने लगे हैं। इससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर विभाग से ट्रेनिंग करने वाले पीआरडी जवानों की सही सूची अब तक तैयार क्यों नहीं की गई। उधर, सीडीओ अर्चना वर्मा का कहना है कि इस मामले की जांच दो अधिकारियों की समिति से कराई जाएगी। समिति में एक एसडीएम को भी रखा जाएगा।

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मेडिकल लीव पर गए अधिकारी
फर्जी पीआरडी जवानों से ड्यूटी कराने का मामला सामने आने के बाद जिला युवा कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार मेडिकल लीव पर चले गए। वे स्थिति को संभालने के बजाए पूरे मामले से दूरी बनाने की कोशिश में जुटे हैं। 

पूर्व में तैनात रहे अधिकारी भी संदेह के दायरे में 
जिले में पूर्व में तैनात रहे जिला युवा कल्याण अधिकारी भी संदेह के दायरे में हैं। किसी ने भी विभाग में तैनात पीआरडी जवानों की सूची तैयार नहीं कराई। साथ ही बिना ट्रेनिंग के प्रमाण पत्र जारी होने के मामले भी सामने आए हैं। वर्तमान में तैनात नरेंद्र कुमार तो अगस्त 2018 में ही जिले में आए थे। पीआरडी के जवानों का आरोप है कि इससे पहले भी बिना ट्रेनिंग कराए बाहरी लोगों से ड्यूटी कराई जाती थी।

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