जैश ए मुहम्मद के आतंकी को अपना प्रवीण बताने वाले परिवार ने डीएनए टेस्ट की मांग उठाई है। कंकरखेड़ा निवासी परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सुबूत मिटाकर प्रवीण को फंसाया है। उन्होंने बताया कि जब से प्रवीण गया है उनका परिवार उजड़ गया है।
कंकरखेड़ा के न्यू गोविंद पुरी में प्रवीण का परिवार रहता है। उसकी पत्नी प्रभा ने बताया कि उनकी शादी 2004 में हुई थी। प्रवीण किराए की टैक्सी चलाते थे। ससुर का दूध का काम था। देवर पवन भी ड्राइवरी करते थे, जबकि दो देवर प्रदीप और शेखर पढ़ते थे। सबकी कमाई से घर का खर्चा चलता था। 5 मई 2005 को मेरठ और दिल्ली पुलिस उनके पति को उठाकर ले गई। 6 मई को अखबारों से पता चला कि दिल्ली पुलिस ने एनकाउंटर में पांच बदमाश मारे हैं। उनमें प्रवीण भी है। परिवार दिल्ली गया तो पता चला कि प्रवीण एनकाउंटर के समय भाग गया।
कर्ज लेकर किया तलाश
प्रभा ने बताया कि परिवार ने कर्ज लेकर पति की तलाश की, लेकिन कहीं पता नहीं चला। तत्कालीन एसएसपी नवनीत सिकेरा से कई बार बरामदगी की गुहार लगाई, लेकिन कुछ नहीं हुआ। लखनऊ और दिल्ली में अधिकारियों से मिले, लेकिन सफलता नहीं मिली।
पति की सलामती के लिए व्रत
प्रवीण की पत्नी ने बताया कि वह हर साल करवाचौथ का व्रत रखकर पति के लिए मन्नत मांगती है। उसे विश्वास है कि वह एक दिन जरूर लौटेंगे। सास और देवर लखनऊ में हैं। प्रशासन ने उन्हें आतंकी बताए जा रहे शख्स से मिलने की इजाजत दे दी है।
पुलिस ने मिटा दी पहचान : पिता
पिता गंगाराम ने बताया कि प्रवीण के हाथ पर उसका नाम लिखा था। माथे पर एक निशान था, गाल पर तिल था। जेल में आबिद के साथ सजा काटकर आए जियाउद्दीन ने बताया कि माथे पर निशान और गाल पर तिल तो है, लेकिन हाथ जला है। पिता ने आशंका जताई कि पुलिस ने उसकी पहचान छिपाने की वजह से हाथ जला दिया है।
‘मेरे पापा आतंकवादी नहीं हैं’
प्रवीण के गायब होने के वक्त उनका बेटा अंशुल केवल पांच महीने का था। आज वह साढ़े 10 साल का है। जब उससे पिता के बारे में पूछा गया तो वह रोने लगा। रोते हुए बोला उसके पापा आतंकवादी नहीं हैं। वह सीएम से मिलकर अपने पापा को छुड़ाने की गुहार लगाएगा।
प्रवीण की कलाई पर बांधूंगी राखी
प्रवीण की सबसे छोटी बहन प्रियंका ने कहा कि उनके भाई प्रवीण हर साल रक्षाबंधन पर उसके लिए गिफ्ट लाता था। वह तीनों बहनों को बहुत प्यार करता था। उन्हें पूरा भरोसा है कि भाई ने कोई गलत काम नहीं किया है। वह रक्षाबंधन पर भाई के हाथ में राखी बांधेगी।
ये है मामला
लखनऊ की विशेष अदालत ने तीन आतंकियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उनमें से आबिद नाम के शख्स को मेरठ का प्रवीण होने का दावा कंकरखेड़ा का परिवार का रहा है।
आज जेल में आबिद से मिलेगा परिवार
लखनऊ। कंकरखेड़ा निवासी परिवार को प्रशासन ने जेल में आबिद से मिलने की इजाजत दे दी है। रविवार 11 बजे एटीएस, एसटीएफ, एलआईयू आदि एजेंसियों की मौजूदगी में यह मुलाकात होगी। रिहाई मंच द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने बताया है कि महेश देवी और उनके बेटे पवन कुमार ने रिहाई मंच के अध्यक्ष अधिवक्ता मोहम्मद शुएब के नेतृत्व में शनिवार को डीएम आवास पहुंचे। डीएम का प्रभार देख रहे सीडीओ से जेल में बंद आबिद से मिलाने की मांग की। परिजनों का संदेह दूर करने को सीडीओ ने इजाजत दी है।