हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान में सातवें दिन भाव भूषण महाराज ने कहा कि जैनकुल बहुत पुण्य से मिलता है भगवान की स्तुति सर्व दुख, दोष नाशिनी है।
शनिवार को शांतिनाथ विधान में मुख्य वेदी में विराजमान त्रय तीर्थंकरों का जलाभिषेक किया गया। शांतिधारा करने का सौभाग्य विशनश्रुत परिवार नवीन जैन, मनोज जैन, शुभचंद्र जैन, आशा जैन, नवहिन्द कोे प्राप्त हुआ। शांतिधारा में सहयोग डाॅ. प्रवीण जैन, डाॅ. आदि जैन ने किया।
विधान के मध्य 108 भाव भूषण महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि बीतरागता को प्राप्त करने के लिए मोह का तूफान छोड़ना पडेगा। वह परिणाम प्राणी के हमेशा बने रहें। तो जीव का कल्याण हो जाएगा। जिस तरह सूर्य बहुत दूर रहता हुआ भी प्रकाश करता है तथा कमलों के वन में कमल के फूलों को विकसित कर देता है। महाराज ने आगे बताया कि प्रभु की भक्ति करने से सभी रोगों का क्षय हो जाता है मन तथा आत्मा को शांति मिलती है। इस दौरान सारिका जैन, अर्पित जैन, श्रेया जैन, आकांक्षा जैन, मृदुला जैन, शशांक जैन, अनंतवीर जैन, ऋतु जैन, संजय जैन आदि का विधान संयोजक व क्षेत्र के सदस्य विजय कुमार जैन ने मंगल तिलक, माल्यार्पण व मुकुट बांधकर तीर्थ क्षेत्र कमेटी की ओर से अभिनंदन किया। इस दौरान ब्र. सुनीता दीदी ने मंत्रोचार पूर्वक विधि विधान की क्रियाएं कराई।
शाम को संगीत की मधुर ध्वनि के साथ पंचपरमेष्ठी भगवान, श्री शांतिनाथ भगवान चौबीसों तीर्थंकर भगवान की आरती की गई। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रशनमंच के माध्यम से जैन धर्म के प्रश्नों को पूछा गया। इस दौरान अध्यक्ष जिवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, अभय कुमार जैन, अतुल जैन, पंकज जैन, मुकेश कुमार जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन आदि का सहयोग रहा।