प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर शहर में भोले भाले लोगों को धोखा दिया जा रहा है। अपने आवास की चाह में लोग साइबर कैफे पर लाइनों में लगे हैं और यहां भी आवेदन कर उनसे उगाही की जा रही है। विडंबना यह है कि शहरी क्षेत्र में इस योजना में आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 नवंबर थी जिसे गुजरे एक माह से भी ज्यादा का समय हो गया है।
यह है प्रधानमंत्री आवास योजना
प्रधानमंत्री आवास योजना केन्द्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना हैं जिसमें शहरी गरीब जनता को कम ब्याज पर घर के लिए ऋण मुहैया कराया जाएगा। छूट भी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि वर्ष 2022 तक हर किसी को अपना घर मिल जाए। शहरी क्षेत्र में इस योजना का क्रियान्वयन डूडा (डिस्ट्रिक्ट अरबन डेवलेपमेंट एजेंसी) के माध्यम से जबकि ग्रामीण क्षेत्र में इसका क्रियान्वयन जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के जरिए कराया जाएगा। इस योजना का लाभ केवल उसी को मिलेगा जिसकी वार्षिक आय छह लाख रुपये से कम होगी।
इस तरह होगा काम
शहरी क्षेत्र में इसके लिए पहले मेन्युअल और बाद में ऑनलाइन फार्म आमंत्रित किए गए। शहरी क्षेत्र में जितने भी आवेदन होंगे उन सभी का सत्यापन होगा। देखा जाएगा कि आवेदन करने वाले पात्र है या नहीं। फाइनल लिस्ट बनने केबाद तय होगा कि कितने आवास चाहिए। फिर उसकी डीपीआर बनाई जाएगी। इसे सरकार का अनुमोदन होगा तब जाकर बजट पास होगा और फिर काम शुरू होगा।
ग्रामीण क्षेत्र में जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के माध्यम से काम होगा। वर्ष 2012 में हुई सामाजिक, जातिगत एवं आर्थिक जनगणना में आवासहीन लोगों के आंकड़े पर काम होगा।
तारीख खत्म, शहर में 28 हजार आवेदन
पीओ डूडा आरपी सिंह के मुताबिक शहरी क्षेत्र में इस योजना में आवदेन करने की अंतिम तारीख 15 नवंबर थी। इस तारीख कुल 28 हजार लोगों ने आवेदन किया है। उन्हीं का सत्यापन होगा। इन्हीं में से चुना जाएगा कि कौन पात्र। उसी हिसाब से डीपीआर बनेगी। उधर पीडी डीआरडीए डा. रवि किशोर त्रिवेदी के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में सत्यापन हो चुका है। कुल 19 सौ लोग पात्र पाए गए हैं। उनके आवास का तरीका यही होगा कि जमीन उनके पास अपनी हो। उन्हें एक लाख बीस हजार रुपये की सहायता देकर उनका मकान बनवाया जाएगा।
पर यहां तो हो रहा है जनता से धोखा
आवेदन की तारीख खत्म हो चुकी है पर शहर भर में साइबर कैफों पर लाइने लगी हैं। आवेदन किए जा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन के नाम पचास से सौ रुपये तक लिए जा रहे हैं। साइट खुली है। चूंकि फार्म उस पर अपलोड है ऐसे में उसकी को भरकर वापस प्रिंट दिया जा रहा है। जनता को यह पता ही नहीं कि अब किए गए आवेदनों पर कोई विचार नहीं होगा।