पावर ऑफ अटार्नी के माध्यम से संपत्ति के क्रय-विक्रय की आड़ में होने वाले खेल को रोकने के लिए शासन स्तर से कडे़ कदम उठाए गए हैं। नए नियमों के जारी होने से ब्लैक मनी पर रोक लगेगी। साथ ही राजस्व में भी इजाफा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
अपर महानिरीक्षक निबंधन अखिलेश कुमार श्रीवास्तव की ओर से सभी जिला निबंधन विभागों को पत्र जारी किए गए है। पत्र के माध्यम से कहा गया है कि अक्सर संपत्ति मालिक दूसरे शहर और प्रदेश के लोगों के नाम पावर ऑफ अटार्नी कर देता है। जबकि वास्तव में जिस व्यक्ति के नाम पावर ऑफ अटार्नी होती है, उसे जमीन क्रय कर दी जाती है। ऐसे में संपत्ति की खरीद-फरोख्त के लिए ब्लैक मनी का लेनदेन किया जाता है। साथ ही प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री नहीं होने से शासन को राजस्व का भी नुकसान होता है। ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिए अब शासन ने कडे़ कदम उठाए हैं। नए नियमों के तहत पावर ऑफ अटार्नी का पंजीकरण तभी होगा जब पावर ऑफ अटार्नी करने वाला या जिसके पक्ष में हो रही है, दोनोें में से किसी एक का निवास या संपत्ति उसी निबंधन क्षेत्र में होगी। साथ ही जिसके पक्ष में पावर ऑफ अटार्नी की गई है, वह संपत्ति को विक्रय करता है तो संपत्ति की रकम मूल संपत्ति मालिक (जिसने पॉवर ऑफ अटार्नी की थी) के बैंक खाते में जाएगी।