इस तरह उपभोक्ता की जेब से हर महीने 50 रुपये से ज्यादा निकलेंगे। अगर नियामक आयोग ने प्रस्तावित स्लैब को हरी झंडी दे दी तो पीवीवीएनएल के 40 लाख उपभोक्ताओं को 50 रुपये अतिरिक्त के हिसाब से हर महीने करीब 20 करोड़ ज्यादा देने होंगे। वहीं, मेरठ शहर के ढाई लाख घरेलू उपभोक्ताओं की जेब पर हर महीने एक करोड़ रुपये से ज्यादा का बोझ पड़ेगा।
ग्रामीण भी होंगे प्रभावित
प्रस्तावित स्लैब से ग्रामीण उपभोक्ताओं की जेब पर भार पड़ना तय है। मौजूदा पांच स्लैब को घटाकर तीन करने का प्रस्ताव दिया है। ग्रामीण अनमीटर्ड स्लैब खत्म करके दो किलोवाट की जगह चार किलोवाट का नया स्लैब प्रस्तावित है।
बिजली टैरिफ और स्लैब आदि तय करने का अधिकार राज्य विद्युत नियामक आयोग को है। पवार कारपोरेशन ने प्रस्ताव भेजा है। इस पर आयोग जनसुनवाई करेगा। उपभोक्ता अपनी आपत्ति जनसुनवाई के वक्त दे सकता है। हमारा कार्य उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति करना है। इसे बखूबी किया जा रहा है। -अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी पीवीवीएनएल