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मेडिकल में पद खाली... इलाज हुआ बेमानी

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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में बेहतर इलाज मिले भी तो कैसे। एक तरफ 43 चिकित्सकों की कमी बड़ी परेशानी का सबब बनी है तो दूसरी तरफ 30 श्रेणी में 211 पद काफी समय से रिक्त हैं। इनकी कमी की वजह से मरीजों को अच्छा इलाज मिलने में परेशानी आती है, क्योंकि चिकित्सकों के साथ-साथ अस्पताल में इन पदों पर कार्यरत स्टाफ (सिस्टर, उपचारिका, लैब टैक्निशियन, एक्सरे टेक्नीशियन, लैब अटेंडेंट और वार्ड ब्वाय-आया आदि) की भूमिका भी बेहद अहम होती है।
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मेडिकल कॉलेज में रिक्त पड़े पद समूह ख, ग और घ के तहत हैं। प्रभारी अधिकारी फार्मेसी, उप नर्सिंग अधीक्षिका और प्रधान ट्यूटर का एक-एक पद खाली है, जबकि पीएनएस ट्यूटर के सातों पद रिक्त हैं। सिस्टर 48 होनी चाहिए, जबकि हैं 36 हैं, इनके 12 पद रिक्त हैं। उपचारिका (नियमित) 111 पद हैं, इनमें से 82 कार्यरत हैं, यानि 29 पद रिक्त हैं। पीएचएन ट्यूटर और ओटी सुपरवाइजर के चारों पद रिक्त चल रहे हैं, जबकि लेखा लिपिक के दो पद रिक्त हैं। खजांची, वरिष्ठ लिपिक, स्टीवर्ड का एक-एक पद रिक्त हैं। कनिष्ठ लिपिक के सात पद में से चार कार्यरत हैं और तीन पद रिक्त हैं। लैब टेक्नीशियन के 14 पद हैं, जिनमें 11 कार्यरत हैं, तीन पद रिक्त पड़े हैं। एक एक्सरे टेक्नीशियन का पद खाली है। इनके अलावा चपरासी के दो पद, टेलीफोन अटेंडेंट का एक पद, लैब अटेंडेंट के छह पद, भिष्ती के तीन पद, धोबी के छह पद, माली का एक पद, बियरर के चार पद, वार्ड ब्वाय-आया के 42 पद खाली हैं। लिफ्ट अटेंडेंट के चार पद, स्ट्रेचर बियरर का एक पद, चौकीदार के चार पद, कहार के सात पद, कुक के 12 पद, आया बियरर का एक पद और स्वच्छक के 46 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
मेडिकल में हर रोज आते हैं तीन हजार से ज्यादा मरीज
मेडिकल कॉलेज में हर रोज तीन हजार से ज्यादा मरीज ओपीडी में आते हैं। एक महीने में संख्या 70-75 हजार तक पहुंच जाती है, जो सालभर में नौ लाख का आंकड़ा पार कर जाते हैं। यहां मेरठ के अलावा आसपास के जिलों बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, शामली और बुलंदशहर के भी मरीज आते हैं। पिछले साल यहां करीब साढे़ नौ लाख मरीज आए थे।
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शासन से किया जा रहा पत्राचार
रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है। उम्मीद है कि स्टाफ की कुछ कमी को जल्द ही पूरा किया जा सकेगा। फिर भी मेडिकल में जो भी स्टाफ मिला हुआ है, उसी के जरिये बेहतर इलाज देने की कोशिश की जा रही है।
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- डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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