एक माह पूर्व मां की मौत के कारण बच्चा डिप्रेशन में चला गया। 14 दिन तक मन अशांत करने के बाद भी समस्या जारी रही। पिता से बात करना भी छोड़ दिया। मनोचिकित्सक से बात करते हुए बच्चे ने बताया कि दिनभर प्रेयर करता हूं कि मुझे भी मौत आ जाए।
सोशल साइट पर आपत्ति जनक वीडियो और वेब सीरीज में एंटरटेनमेंट के नाम पर परोसी जा रही अश्लीलता ने बच्चों को प्रभावित किया है। शहर के 8 से 13 साल के बच्चे पोर्न एडिक्ट हो रहे हैं। मनोचिकित्सक से 10 में से 6 बच्चों ने इस तरह के प्रश्न किए। प्रश्न पूछने पर अभिभावकों ने बच्चों की पिटाई कर दी है। ऐसे में बच्चे तनाव में आ गए।
ये हैं लक्षण
1. अनहोनी होने पर पहला झटका लगना।
2. दूसरी स्टेज में गुस्सा आना स्वाभाविक है।
3. कठिन समय को देखते हुए समझौता करना।
4. डिप्रेशन का शिकार होना।
5. डिप्रेशन से बाहर आकर सच्चाई को स्वीकार करना।
बच्चों की बातें सुनें अभिभावक
अभिभावकों को बच्चों की बातों को सुनना चाहिए। गलत बात को भी पहले ध्यान से सुनें और उसके बाद उसको सही बात बताएं। ऐसे न करने पर गलत जगह से ऐसी चीजों की जानकारी लेंगे जो बच्चों के लिए नुकसानदायक भी हो सकती है। -डॉ. कशिका जैन, साइकोलॉजिस्ट
महामारी में बढ़ा तनाव
लोगों को गलत बातें ही सुनने को मिल रहीं हैं। ऐसे में शरीर में स्ट्रेस हारमोन का रिसाव बहुत बढ़ गया है। बड़ों द्वारा की जाने वाली बातों का बच्चों पर बहुत गलत प्रभाव पड़ता है। ऐसे में बच्चों का विशेष ध्यान देखने की जरूरत है। -डॉ. अंशु जिंदल, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ
अनुशासन से होगा समाधान
बच्चों का सुबह उठने से लेकर सोने तक टाइम टेबल होना चाहिए। हर कार्य अनुशासन में होना चाहिए। हर कार्य के लिए समय निर्धारित होना चाहिए। अभिभावक दिन में एक घंटा बच्चों को अवश्य दें। उसके साथ बैठें और उनकी बातों को सुनें। -रवि राणा, मनोचिकित्सक