लगातार बढ़ रहा प्रदूषण दिमाग पर भी प्रहार कर रहा है। इसके कारण डिप्रेशन और बाइपोलर डिसॉर्डर के मरीज बढ़ रहे हैं। ये मरीज मानसिक रोग विशेषज्ञों के पास पहुंच रहे हैं। इसके अलावा सामान्य तौर पर सांस लेने में हो रही दिक्कत को लोग अस्थमा से जोड़कर देख रहे हैं। उनमें बीमार होने का खौफ है। वायु प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सेहत पर पड़ता है।
मनोचिकित्सक डॉ. रवि राणा के अनुसार, दूषित हवा दिमागी सेहत के लिए भी खतरनाक है। फेफड़ों को नुकसान पहुंचने के अलावा वायु प्रदूषण से अब कई तरह की मानसिक बीमारियों भी हो रहीं हैं, जैसे- डिप्रेशन और बाइपोलर डिसॉर्डर आदि। मैनिक डिप्रेशन या बाइपोलर डिसॉर्डर एक प्रकार की मानसिक बीमारी है। इसमें मन कई हफ्तों या महीनों तक बहुत उदास या फिर अत्यधिक खुश रहता है। इस बीमारी से पुरुष तथा महिलाएं दोनों ही समान रूप से प्रभावित होते हैं। वैसे तो मानसिक बीमारी के बहुत कारण होते हैं, लेकिन वायु प्रदूषण एक नया कारण बनकर उभर रहा है।
मनोचिकित्सक डॉ. कमलेंद्र किशोर ने बताया कि वायु प्रदूषण से सांस लेने में परेशानी होती है। नींद में खलल पड़ता है। इससे मन चिड़चिड़ा हो जाता है। बढ़ते बढ़ते यही डिप्रेशन और बाइपोलर डिसॉर्डर की तरफ चला जाता है। ऐसे में लोग बहुत अधिक थकान भी महसूस करते हैं। प्रदूषण से बचने और अच्छी नींद लेने से वे खुद को फ्रेश महसूस करते हैं। ऐसे लोगों को निर्धारित समय पर सोना जरूरी है। यह भी सुनिश्चित करें कि उनकी नींद में खलल न पड़े।