प्रदूषण: पिछले साल के मुकाबले 24 की रात एक्यूआई 142 फीसदी बढ़ा
मोदीपुरम। दिवाली की रात शहर की हवा में जबरदस्त प्रदूषण रहा। वर्ष 2021 में 24 अक्तूबर को एक्यूआई (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 157 था जबकि इस बार 380 पहुंच गया। यानी 24 अक्तूबर की रात 2021 के मुकाबले एक्यूआई 142 फीसदी ज्यादा रहा।
वर्ष 2021 में दिवाली चार नवंबर को थी और उस रात एक्यूआई 490 पहुंच गया था। इस बार दिवाली 24 अक्तूबर की रही। दिवाली पर पटाखों के शोर और हवा में धूल एवं धुएं के कण ज्यादा होने की वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। हालांकि दोपहर तक एक्यूआई 260 था शामहोते ही 380 पहुंच गया। इस सीजन में पहली बार एक्यूआई 380 तक पहुंचा। मंगलवार को तेज हवाओं ने राहत दी और एक्यूआई 280 पर आ गया।
दिवाली के दिन बढ़ता ही गया एक्यूआई:
सुबह 10 बजे 240
दोपहर 12 बजे 260
दोपहर दो बजे 263
दोपहर चार बजे 280
शाम छह बजे 315
रात आठ बजे 325
रात दस बजे 380
बेगमपुल पर पटाखों का सबसे ज्यादा शोर... पल्लवपुरम भी कम नहीं
2021 के मुकाबले इस बाद दिवाली पर कम हुआ ध्वनि प्रदूषण
संवाद न्यूज एजेंसी
मोदीपुरम। दिवाली पर पटाखों का सबसे अधिक शोर बेगमपुल पर रहा। यहां ध्वनि प्रदूषण 82.9 डेसीबल दर्ज किया गया। दूसरे नंबर पर रेलवे रोड रहा जहां शोर 78.7 डेसिबल पहुंच गया। पल्लवपुरम में भी 78.6 रहा। हालांकि 2021 के मुकाबले इस बार दिवाली पर ध्वनि प्रदूषण काम रहा। प्रतिबंध के बावजूद इस बार शहर से गांव तक चोरी-छिपे पटाखों की खूब बिक्री हुई। दिवाली की रात ध्वनि प्रदूषण का बढ़ा स्तर भी इसकी पुष्टि कर रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर में जिन आठ स्थानों पर शोर की निगरानी कराई वहां सभी जगह ध्वनि प्रदूषण मानक से ज्यादा ही मिला। सबसे कम शोर कैंट हास्पिटल के पास 66.7 डेसीबल रिकार्ड किया गया।
कहां कितना हुआ ध्वनि प्रदूषण (डेसिबल में)
स्थान 04 नवंबर 2021 24 अक्तूबर 2022
सेंसिटिव एरिया
कैंट अस्पताल 64.2 66.7
जिला न्यायालय 76.5 69.3
कॉमर्शियल एरिया
रेलवे रोड 80.1 78.7
बेगमपुल 83.4 82.9
रेजिडेंसियल एरिया
थापरनगर 85.7 73.6
शास्त्रीनगर 72.1 73.3
कैंटोमेंट बोर्ड 63.1 71.9
पल्लवपुरम 75.8 78.6
ये हैं ध्वनि प्रदूषण के मानक
स्थान सुबह 6 से रात 10 तक रात 10 से सुबह 6 बजे तक
सेंसिटिव एरिया 50.00 40.00
रेजीडेंशियल 55.00 45.00
कॉमर्शियल 65.00 55.00
इंडस्ट्रीयल 75.00 70.00
पटाखे, वाहन, जाम और निर्माण से बढ़ा प्रदूषण
ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण बढ़ने की वजह केवल पटाखे नहीं है। वाहनों के शोर और धुएं के अलावा शहर में जगह-जगह चल रहे निर्माण कार्य भी प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। बेगमपुल में सर्वाधिक ध्वनि प्रदूषण रिकार्ड किया गया। शहर में कई स्थानों पर रात 11 बजे के बाद भी पटाखे छोड़े गए।
विजय कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, मोदीपुरम
पटाखों से झुलसे 23 से ज्यादा लोग पहुंचे अस्पताल
मेरठ। दीपावली के मौके पर जिले में लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। इस दौरान कुछ लोग लापरवाही के कारण झुलस भी गए। इनमें से 23 लोग जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचे। इनमें से किसी का हाथ जख्मी था तो किसी का पैर। किसी का चेहरा झुलस गया था तो किसी की गर्दन। हालांकि गंभीर रूप से कोई भी झुलसा हुआ नहीं था।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. दिवाकर ने बताया कि सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक 11 लोग झुलसे हुए आए। इनमें से कोई भी गंभीर नहीं था। इन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि दिवाली के कारण इमरजेंसी में पहले से ही व्यवस्था की हुई थी, लिहाजा किसी को कोई परेशानी नहीं हुई। मामूली रूप से झुलसे हुए 12 लोग इमरजेंसी में आए। ब्यूरो