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Meerut: वोट बैंक की जद्दोजहद में कपसाड़ में डटे रहे नेता, जातीय समीकरण साधने की सियासी कवायद

Sat, 10 Jan 2026 11:48 AM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

कपसाड़ हत्याकांड में जातीय समीकरणों को लेकर सियासी जद्दोजहद तेज। ठाकुर चौबीसी और दलित वोट बैंक की फिक्र में सपा-भाजपा नेता गांव में डटे, जानिए पूरा राजनीतिक विश्लेषण।

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कपसाड़ में सियासी जमावड़ा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में ठाकुर चौबीसी के कपसाड़ गांव की घटना में आरोपियों की जाति को मुद्दा बनाकर भाजपा को घेरने की विपक्षी दलों की रणनीति फिलहाल फेल हो गई है। अनुसूचित जाति व ठाकुर समाज के वोट बैंक की फिक्र में सपा और भाजपा के नेता पूरे दिन कपसाड़ गांव में डटे रहे।

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सपा नेता जहां पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता आदि मांगों पर डटे रहे तो भाजपा नेता लगातार आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन देते रहे। बाद में पूर्व विधायक संगीत सोम ने प्रशासन की सहायता से पीड़ित परिवार को मनाकर विपक्षी दलों के हमलों को फिलहाल कुंद कर दिया है।

कपसाड़ पहुंचे संगीत सोम - फोटो : अमर उजाला
सरधना विधानसभा का कपसाड़ गांव ठाकुर चौबीसी के अंतर्गत आता है। ठाकुर चौबीसी के दम पर ही पूर्व विधायक संगीत सोम 2012 और 2017 में सरधना में कमल खिलाने में कामयाब रहे। 2022 में ठाकुर वोटरों की नाराजगी और अनुसूचित जाति के वोट सपा के पाले में जाने से संगीत सोम को हार का सामना करना पड़ा।

ऐसे समय में हुई कपसाड़ की घटना ने संगीत सोम और भाजपा की पेशानी पर बल डाल दिए। विधायक अतुल प्रधान ने तत्काल सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को मामले की जानकारी दी। अखिलेश यादव ने इस घटना को मुद्दा बनाकर योगी सरकार पर हमला कर दिया।

आसपा अध्यक्ष व सांसद चंद्रशेखर रावण ने भी गांव पहुंचने की घोषणा कर दी और बसपा प्रमुख मायावती ने भी एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके घटना की निंदा की। सपा व आसपा नेताओं ने आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलाने की मांग कर दी।

धरने पर बैठे अतुल प्रधान - फोटो : अमर उजाला
ठाकुर को नाराज ना करने व दलितों को मनाने की रही चुनौती
कपसाड़ में शुक्रवार को दिनभर घटनाक्रम बदलता रहा। विधायक अतुल प्रधान को गांव में जाने से रोका गया तो पीड़ित पक्ष खुद ही विधायक के पास पहुंच गया। यह देखकर भाजपा नेताओं को मामला अपने हाथ से जाता दिखाई दिया।

भाजपा नेताओं के सामने ठाकुर समाज को नाराज नहीं करने और दलितों को भी मनाने की चुनौती खड़ी हो गई। इसके बाद भाजपा नेता गांव में पहुंचने शुरू हुए ताकि मामले को संभाला जा सकें।

सपा, आसपा और भाजपा के नेता पहुंचे गांव
कपसाड़ गांव में सपा विधायक अतुल प्रधान, भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सूद गांव पहुंचे। सपा विधायक ने अपनी ओर से दो लाख रुपये की सहायता दी और अखिलेश यादव की ओर से तीन लाख रुपये देने की बात कही। आसपा अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल पर आश्वासन दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान व भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा भी पीड़ित पक्ष के पास पहुंचे और आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया।
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गांव में तैनात फोर्स - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन की सहायता से कराया गया समझौता
मामला हाथ से निकलता देखकर पूर्व विधायक संगीत सोम पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे और प्रशासन की सहायता से समझौते की पटकथा लिखी गई। पुलिस प्रशासन ने 48 घंटे में युवती की बरामदगी, परिवार के एक सदस्य को चीनी मिल में नौकरी, शस्त्र लाइसेंस देने व दस लाख रुपये का मुआवजा देने, पुलिस सुरक्षा देने का आश्वासन दिया।

पीड़ित परिवार मृतका का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हो गया। इससे फिलहाल भाजपा नेताओं ने राहत की सांस ली है लेकिन सपा व आसपा नेता इस मामले को लेकर लगातार भाजपा सरकार पर हमला कर रहे हैं।

वेस्ट यूपी की चर्चित सीट है सरधना
मेरठ जिले की सरधना विधानसभा सीट मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट का हिस्सा है। यहां से पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान दो बार सांसद रहे हैं। संजीव बालियान की हार का कारण सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम के समर्थकों को बताया जाता है तो 2022 में हुई संगीत सोम की हार के लिए संजीव बालियान को दोष दिया जाता है। संगीत सोम और सपा विधायक अतुल प्रधान की सियासी खींचतान के लिए भी सरधना सीट चर्चित रहती है। 

प्रभारी मंत्री ने डीएम और एसएसपी को गांव में भेजा
जिले के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह गुरुवार रात मेरठ पहुंचे। उन्होंने तत्काल डीएम डॉ. वीके सिंह और एसएसपी डाॅ. विपिन ताड़ा को बुलाकर घटना की जानकारी ली। प्रभारी मंत्री ने दोनों अधिकारियों को सीधे गांव में भेजकर मामले में आरोपियों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए। इसी कारण शुक्रवार को प्रभारी मंत्री की समीक्षा बैठक में भी दोनों अधिकारी नहीं पहुंचे।
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