पुलिस के गवाह भी हो गए थे पक्षद्रोही
बुढ़ाना। जैश ए मोहम्मद के आतंकी मोहम्मद वारस और उसे शरण देने के आरोपी जौला निवासी अशफाक उर्फ नन्हें के देशद्रोह के आरोप से बरी होने पर पुलिस की जांच और अभियोजन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गिरफ्तारी के समय कई अधिकारियों ने जौला से आतंकवादी को पकड़ने में अपनी मौजूदगी दर्शाई थी। बाद में गवाह और प्रत्यक्षदर्शी सभी पक्षद्रोही हो गए, साथ ही प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया।
जैश ए मोहम्मद के आतंकी मोहम्मद वारस और उसे शरण देने के आरोपी जौला निवासी अशफाक उर्फ नन्हें को हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर बरी कर दिया है। हाई कोर्ट ने इस मामले में जांच अधिकारियों और अभियोजन पक्ष पर भी टिप्पणी की है कि इनकी अयोग्यता का लाभ आरोपियों को मिला। दोनों के खिलाफ देशद्रोह के आरोप हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से अनुमति नहीं ली। उन्हें आर्म्स एक्ट और विदेशी अधिनियम की धाराओं में दोषी माना गया। इनमें सुनाई सजा वह जेल में काट चुके हैं।
सेवानिवृत्त और कांधला थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष जेके तोमर ने बताया कि घटना के समय प्रमोशन पाने के लालच में जनपद के कई अधिकारियों ने जौला से आतंकवादी को पकड़ने में अपनी मौजूदगी दर्शाई थी। उन्होंने बताया कि न्यायालय में सभी मौके के गवाह व प्रत्यक्षदर्शी पक्ष द्रोही हो गए थे। उस समय उन्हें लगा था कि इसकी वजह से आतंकवादी व उसका शरणदाता न्यायालय से बरी न हो जाए। उन्होंने रात-दिन इस केस को लेकर होमवर्क किया। दोनों अपराधियों को सेशन कोर्ट में सजा दिलवाई थी।
19 साल पहले हुई थी गिरफ्तारी
करीब 19 साल पहले 31 मार्च 2000 को मध्य रात्रि के समय कांधला कोतवाली के तत्कालीन थानाध्यक्ष जेके तोमर ने कांधला पुलिस के साथ जौला गांव में छापा मारा था। उन्होंने गांव जौला निवासी अशफाक उर्फ नन्हें पुत्र रसीद के घर से पाकिस्तानी युवक को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान पाकिस्तानी युवक ने अपना नाम मोहम्मद वारस उर्फ राजा बताया। वह पाकिस्तान में जिला गुजरांवाला मोहल्ला बरकतपुरा थाना सदर का रहने वाला था। तत्कालीन थानाध्यक्ष के अनुसार गृहमंत्री को आतंकियों द्वारा बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। वारस से पूछताछ के बाद पुलिस व इंटेलिजेंस ब्यूरो ने उसकी निशानदेही पर जौला गांव से उसके कमरे से पाकिस्तान के बने हुए चार हैंडग्रेनेड और पिस्टल बरामद की थी। दोनों को सेशन कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। मोहम्मद वारस बरेली की सेंट्रल जेल में और अशफाक आगरा जेल में अपनी सजा काट रहे हैं।
परिजनों ने चुप्पी साधी
अशफाक को बरी करने की सूचना से उसके परिवार व जौला गांव में खुशी है। हालांकि परिजन अभी इस मामले में कुछ बोलने से बच रहे हैं। ग्राम प्रधान हाजी जमशेद ने बताया कि अशफाक सात बच्चों का पिता है। जिनमें चार बेटियां व तीन बेटे हैं। सबसे बड़ी बेटी ने गजाला ने बीए पास कर लिया है। घर का खर्चा पुश्तैनी जमीन से चलता है। उन्होंने हाईकोर्ट के निर्णय का उन्होंने स्वागत किया। ग्राम प्रधान का कहना है कि हाईकोर्ट के निर्णय से जौला के ग्रामीण पर आतंकवादियों से जुड़े रहने का दाग धुल गया।