शामली के कैराना में शासन के निर्देश पर मंगलवार को पुलिस प्रशासन की टीम ने कैराना की गलियों में पहुंचकर जानकारी जुटाई। पूर्व में सांसद हुकुम सिंह ने जिन परिवारों के पलायन की सूची जारी की थी, उनके घरों तक पहुंचे। साथ ही उन व्यापारियों से भी बातचीत की, जो प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कैराना लौट आए हैं।
30 मई 2016 को भाजपा सांसद रहे हुकुम सिंह ने कैराना से 346 हिंदू परिवारों के पलायन की सूची जारी की थी। इस मुद्दे को लेकर देश की राजनीति में भूचाल आ गया था, तब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। वहीं, भाजपा नेताओं ने कहा था कि भाजपा की सरकार बनने पर पलायन रोकने के लिए अलग से विभाग का गठन किया जाएगा। इसी कवायद में पिछले दिनों प्रदेश शासन के गृह विभाग के सचिव ने पलायन के संबंध में रिपोर्ट मांगी। इसी के चलते पुलिस अधीक्षक देवरंजन वर्मा के निर्देश पर मंगलवार को अपर पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार, सीओ राजेश तिवारी और कैराना कोतवाली प्रभारी निरीक्षक भगवत सिंह ने पलायन की सूची लेकर कैराना में जांच की। टीम ने मोहल्ला गुम्बद में टीटू हलवाई के मकान पर पहुंचकर जानकारी की, तो पता चला कि रंगदारी की धमकी के बाद टीटू हलवाई का परिवार मकान को किराये पर देकर देहरादून चला गया। इसके बाद मोहल्ला पट्टोवाला में राधेलाल के मकान को देखा, जो कई वर्षो से बंद है और उसमें घास उग आई है। इसके बाद टीम मोहल्ला शंकर शौदियान में विक्की के मकान पर पहुंची। विक्की रंगदारी की दहशत के कारण पलायन करके दिल्ली चला गया था। हालांकि 10 माह पूर्व माहौल ठीक होने पर वह वापस कैराना आ गया। इसी मोहल्ले के नवीन ने बताया कि वह 2015 में डर के कारण परिवार सहित दिल्ली चला गया था। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद माहौल ठीक होने पर 10 माह पूर्व वापस आ गया। फिर टीम ने चौक बाजार स्थित मूला पंसारी की दुकान पर पहुंचकर वहां बैठे जितेंद्र मित्तल से बातचीत की। जितेंद्र मित्तल ने बताया कि दिसंबर 2013 में मुकीम काला गिरोह ने उसके भतीजों से रंगदारी मांगी थी, जिसके बाद 2014 में तीन व्यापारियों की हत्या होने के कारण उसके भतीजे परिवार सहित पलायन कर गए थे। इस दौरान पुलिस टीम ने पलायन से जुड़े लोगों के फोन नंबर भी डायरी में नोट किए। एएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि जांच पूरी करने के बाद उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी।