इस तरह बनाते थे फर्जी आयुष्मान कार्ड
एसपी के मुताबिक आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि वे गांव-गांव जाकर लोगों का डाटा एकत्रकर लैपटाप के माध्यम से पूर्व में बनाए गए लोगों के आयुष्मान कार्ड पर एकत्र किए गए फोटो व पते को एडिट करने के बाद फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर ग्रामीणों को देते थे। एक कार्ड बनाने की एवज में एक हजार रुपये तय थे। 500 रुपये कार्ड बनाने से पहले और 500 रुपये कार्ड बनाने के बाद लेते थे। कार्ड को असली दर्शाने के लिए लोगों के बायोमेट्रिक मशीन से अंगूठे के निशान भी लेते थे और साइट पर बनाए जाने वाले व्यक्ति का पूरा डाटा एडिटिंग की मदद से दिखाकर उसे विश्वास में ले लेते थे। आरोपी इस तरह के फर्जी आयुष्मान कार्ड गांव हरड फतेहपुर, आल्दी और कैराना में भी बना चुके थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूर्व में गांवों में आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए लगाए गए कैंपों में जाते थे, वहीं से उन्होंने आयुष्मान कार्ड बनाने का तरीका सीखा था।
आरोपियों का प्रोफाइल
कन्हैयालाल उर्फ विराट उम्र 22 वर्ष शिक्षा बीकॉम
जोगेंद्र उर्फ भोंदा उम्र 27 वर्ष शिक्षा आइटीआई
अमित उम्र 27 साल शिक्षा बीए
रमन उम्र 21 साल शिक्षा बीकॉम
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