पाइन डिविजन ने सोमवार को 52वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर डिविजन के अधिकारियों और जांबाजों के शौर्य को याद किया गया। इस दौरान शहीदों की श्रद्धांजलि दी गई। बैंड की बीट और गीतों की धुन से वातावरण देशभक्ति की धुन में रंग गया। शाम को पारिवारिक कार्यक्रम में अधिकारी और सिपाहियोें के परिवार एक-दूसरे से मिले।
पाइन डिविजन के जीओसी मेजर जनरल राजेश चाबा ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान डिवीजन की गौरवगाथा याद की गई। स्थापना दिवस की व्यापक स्तर पर तैयारी की गई थी। शाम को अधिकारियों और सिपाहियों के परिवार एक-दूसरे से मिले। इस दौरान डिवीजन के इतिहास के बारे में जानकारी दी गई। जीओसी ने बताया कि डिविजन की स्थापना 1940 में 9 डिविजन के मेजर जनरल अर्थर एडवर्ड ने की गई थी। 1964 में डिविजन को पर्वतीय डिविजन के रूप में परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित मेजर जनरल पीएस भगत ने दोबारा खड़ा किया। 1970 में डिविजन को इंफेंट्री डिविजन का दर्जा प्राप्त हुआ। 1976 में डिविजन रांची से मेरठ आ गई।
वर्ल्ड वार से आपरेशन रक्षक तक
पाइन डिविजन को सेकेंड वर्ल्ड वार के दौरान जापानियों का मुकाबला करने के लिए मलाया के पूर्वी तटीय क्षेत्र में तैनात किया गया था। डिविजन के आठ इंफेंट्री ब्रिगेड के सैनिक दुश्मनों के साथ बहादुरी से लड़े। युद्ध में तीन हजार जापानी सैनिक मारे गए। 1965 और 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी डिविजन ने अपना लोहा मनवाया। 1965 के युद्ध में डिविजन को पूर्वी पाकिस्तान सीमा पर तैनात कर दक्षिण-पश्चिम सेक्टर में जेसोर पर कब्जा करने का दायित्व सौंपा गया। डिविजन ने दुश्मन को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया। आपरेशन ट्राइडेंट और आपरेशन रक्षक का हिस्सा भी डिजिवन रही है। दिसंबर 1990 से जुलाई 1991 तक चले आपरेशन रक्षक में 74 आतंकवादियों को मार गिराया।