विश्वविद्यालयों को अब अपने पीएचडी स्कॉलर्स का डाटा वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। ऐसा करने के लिए यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) ने निर्देश जारी किया है। दो महीने के अंदर डाटा अपलोड कर यूजीसी को लिंक मुहैया कराने और हार्डकॉपी को सत्यापित करके भेजने के लिए कहा गया है। इसका पालन नहीं करने पर विश्वविद्यालय को डिफॉल्टर सूची में डाल दिया जाएगा।
यूजीसी सचिव जसपाल एस संधू की ओर से सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति के लिए सर्कुलर जारी किया गया है। इसके तहत पीएचडी स्कॉलर्स का डाटा व्यवस्थित करने के लिए 27 सितंबर 2016 को यूजीसी ने पत्र जारी किया था। 22 फरवरी को यूजीसी की हुई 521वीं मीटिंग में तय किया गया कि विवि अपनी वेबसाइट पर पीएचडी स्कॉलर्स का डाटा अपलोड करें। डाटा देने के लिए फार्मेट का परफोर्मा जारी किया गया है। इसमें फैकल्टी, डिपार्टमेंट, सुपरवाइजर का नाम, स्कॉलर का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, रजिस्ट्रेशन डेट, टॉपिक का नाम, फेलोशिप की जानकारी और फेलोशिप देने वाली एजेंसी की जानकारी मांगी है। 10 मार्च को जारी आदेश के तहत दो महीने के अंदर डाटा अपलोड करने और हॉर्ड कॉपी भेजने को कहा गया है। इसके तहत स्कॉलर्स छात्रों की जानकारी एक जगह संगठित रूप से रखने की यह कवायद है। पॉलिसी से लेकर ग्रांट तक के मामले में इस इनपुट से कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकते हैं।