- चंद्रग्रहण का भारत में नहीं होगा कोई प्रभाव
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जा रहा है। इसको हुताशनी पूर्णिमा, फाल्गुनिका, पटवास विलासिनी भी कहते हैं। फाल्गुन की पूर्णिमा मन्वादि है और इसी का नाम होलिका है। अतंर इतना है की मन्वादि के लिए पूर्वाह्व्यापनी ग्रहण करनी चाहिए और होलिका पर्व मनाने के लिए प्रदोषव्यापनी और भद्रा से रहित ग्रहण करनी चाहिए। होली का प्रमुख कृत्य है होलिका दहन होता है।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि होलिका दहन में पूर्व विधा प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा ली जाती है। यदि वह दो दिन प्रदोष व्यापिनी हो तो दूसरी लेनी चाहिए। होलिका दहन में भद्रा का त्याग प्रमुख विषय है। अतः इस वर्ष भद्रा का ही विशेष ध्यान रखना है। ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि प्रतिपदा, चतुर्दशी, भद्रा और दिन के समय होली जलाना सर्वथा त्याज्य है।
होलिका दहन आज रात्रि 11:31 बजे होगा
इस वर्ष बृहस्पतिवार 13 मार्च को रात्रि में होलिका दहन शास्त्र सम्मत है। दहन का समय रात्रि 11:31 से एक घंटे बाद तक है। इस वर्ष प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त हो रही है। होली में सुबह 10:36 से रात्रि 11:30 तक भद्रा का वास रहेगा। अगले दिन पूर्णिमा प्रदोष व्यापिनी नहीं है। शास्त्र कहते हैं यदि पहले दिन प्रदोष के समय भद्रा हो और दूसरे दिन सूर्यास्त से पहले पूर्णिमा समाप्त होती है। तो भद्रा के समाप्त होने की प्रतीक्षा करके पहले दिन होलिका दहन करना चाहिए।
होलिका की अग्नि अत्यंत पवित्र
होलिका की अग्नि अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि होलिका की अग्नि में कुछ विशेष चीजों को डालने से जीवन में सुख समृद्धि का आगमन होता है। होलिका में कोई भी अपवित्र चीज डालने की मनाही होती है। मान्यता है कि इसका जीवन में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि होलिका की अग्नि में सूखा नारियल, अक्षत, ताजे फूल, नीम के पत्ते, कपूर का टुकड़े, घी में भिगोए पान के पत्ते, बताशा, चांदी या तांबे के कलश से जल और गुलाल, हल्दी व उपले अर्पित करने चाहिए। पानी वाला नहीं सूखा नारियल चढ़ाए।
होली पर सुबह होगी हनुमान जी की पूजा
होलिका दहन के दिन प्रातः काल हनुमान जी की पूजा की जाती है। प्रार्थना की जाती है कि हमारे सभी कष्टों का निवारण हो। वर्षभर कोई भी बाधा, रोग, शत्रु आदि परेशान न करे। इस दिन हनुमान जी को चोला, लोंग, बताशे चढ़ाए जाते हैं। घी का दीपक, गुगल की धूप, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ, बजरंग बाण, हनुमान बाहुक का पाठ किया जाता है। हनुमान साधक रात्रिकाल में विशेष साधना करते हैं।
कच्चा सूत लाएगा घर में समृद्धि
आचार्य कौशल वत्स ने बताया कच्चे सूत से अपने शरीर को नापकर उस सूत को होली की आग में छोड़ दिया जाता है। एक अन्य विधि सरसों के तेल और आटे को मिलाकर उबटन बनाया जाता है। हाथ पैर आदि अंगों में लगाकर मैल छुड़ाया जाता है। इस मैल को भी एकत्र करके होली की अग्नि में डाल दिया जाता है। इसके बाद होलिका की तीन बार परिक्रमा की जाती है।
भारत में प्रभाव हीन होगा चंद्र ग्रहण
इस वर्ष दुल्हैंडी वाले दिन शुक्रवार को चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। इसका भारत में कोई प्रभाव नहीं होगा। न ही उपाय आदि की आवश्यकता होगी। यह खग्रास चंद्रग्रहण शुक्रवार के दिन सुबह 10:40 से दोपहर 02:18 तक व्याप्त रहेगा। भारत में यह दृश्य नहीं होगा। भारत से बाहर यूरोप, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, प्रशांत अटलांटिक, आर्कटिक महासागर में ही देखा जा सकेगा।