मेरठ। आइसोलेशन वार्ड में मोबाइल ले जाने पर लगाई रोक 24 घंटे में ही हटा दी गई। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा ने प्राचार्यों को पत्र भेजकर लिखा था कि इससे संक्रमण फैलता है। अब आइसोलेशन वार्ड में मोबाइल ले जाने पर कुछ शर्तों का पालन करना होगा।
प्रदेश के कोविड तीन और दो श्रेणी के आइसोलेशन वार्ड में मरीजों को मोबाइल ले जाने की अनुमति पर रोक लगा दी गई थी। इस संबंध में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा ने सभी प्राचार्यों को पत्र लिखकर कहा था कि इससे संक्रमण फैलता है। साथ ही निर्देश दिए कि चिकित्सालय में भर्ती संक्रमित मरीजों को परिजनों से, शासन से या अन्य किसी से बात करने के लिए दो डेडिकेटिड मोबाइल फोन इंफेक्शन प्रिवेंशन कंट्रोल के अनुपालन के साथ वार्ड इंचार्ज के पास रहेंगे। इन मोबाइल नंबर की सूचना मरीजों के परिजनों तथा महानिदेशक कार्यालय को भी उपलब्ध कराएं। जिससे आवश्यकता पड़ने पर मरीजों से बात करना संभव हो सके। हालांकि रविवार को आदेश वापस लेते हुए मरीजों को कुछ शर्तों के साथ मोबाइल ले जाने की अनुमति दे दी गई। इनमें कहा कि आइसोलेशन वार्ड में जाने से पहले रोगी यह डिस्क्लॉज करेगा कि उसके पास मोबाइल एवं चार्जर है। आइसोलेशन वार्ड में मरीज के भर्ती होने से पहले मोबाइल व चार्जर को चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा डिसइनफेक्ट किया जाएगा। रोगी मोबाइल फोन व चार्जर को दूसरे से साझा नहीं करेगा। आइसोलेशन वार्ड से डिस्चार्ज के समय मोबाइल फोन व चार्जर को चिकित्सालय प्रबंधन द्वारा डिसइनफेक्ट करने के पश्चात मरीज को दिया जाएगा। आइसोलेशन वार्ड से निकलने के पश्चात मरीज मोबाइल फोन व चार्जर होने का पुन: डिस्क्लोजर करेगा।
वायरल हुई थीं वीडियो
मेडिकल कॉलेज में लगातार कोविड-19 वार्ड की वीडियो वायरल हो रही थीं। जिनमें से अधिकतर ऐसी हैं जो मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही थीं। वीडियो वायरल होने का मामला शासन तक गूंजा था। सूत्रों का कहना है कि इसी वजह से कोविड वार्ड में मोबाइल ले जाने पर रोक लगाने का निर्णय लिया था।