आयुष्मान के नाम पर किया भ्रमित, मरीजों का हंगामा
मेरठ। आयुष्मान कार्ड धारक से बिल मांगे जाने को लेकर शुक्रवार सुबह गढ़ रोड स्थित एक निजी अस्पताल में हंगामा हो गया। आरोप था कि अस्पताल ने मरीज के उपचार को लेकर तीमारदारों को भ्रमित किया। जब दूसरे अस्पताल ले जाने की बात आई तो उनसे बिल की मांग की गई। सूचना पर मेडिकल और नौचंदी थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और अस्पताल प्रशासन से बात की। घंटों हंगामा चलता रहा। बाद में बिल का भुगतान करने के बाद ही मरीज को रेफर किया गया।
शास्त्रीनगर सेक्टर तीन निवासी अक्षत ने अपनी मां निरूपमा को हाई ब्लड़प्रेशर से हालात बिगड़ने पर 29 नवंबर को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण लोगों ने आयुष्मान कार्ड बनवाने की सलाह दी। उन्होंने अस्पताल में मौजूद आयुष्मान मित्र के पास 3 दिसंबर को कार्ड के लिए आवेदन कर दिया। इस बीच अस्पताल प्रबंधक ने उनसे 55 हजार रुपये जमा करा लिए। अक्षत अपने कुछ रिश्तेदारों को साथ लेकर चिकित्सक से मिले और हालत में सुधार न होने की बात कही। उचित जवाब न पाकर मरीजों ने दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने का मन बनाया। आरोप है कि शुक्रवार सुबह जब रेफर लेटर बनाने की बात आई तो अस्पताल के मैनेजर ने 2.42 लाख रुपये जमा कराने की बात कही। तब तक आयुष्मान गोल्डन कार्ड बन चुका था। अक्षत ने आयुष्मान कार्ड धारक होने की जानकारी दी तो अस्पताल ने उसे मानने से इंकार कर दिया। देखते ही देखते हंगामा हो गया। पुलिस की मौजूदगी में मरीज के तीमारदारों की तरफ से 2.42 लाख रुपये जमा कराए गए। इसके बाद ही रेफर लेटर तैयार किया गया।
भ्रम में रखकर उपचार देने का आरोप
अस्पताल में हंगामे की सूचना पाकर प्रधानमंत्री जनकल्याण योजना प्रचार प्रसार अभियान की प्रदेश प्रमुख प्रीति पांडे और संयोजक हिमानी गुप्ता भी वहां पहुंच गये। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से बात की तो जवाब कुछ और ही मिला। अस्पताल प्रशासन ने उन्हें बताया कि अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारक केवल हृदय और हड्डी से जुड़ा इलाज ही करा सकते है। इस पर अभियान के पदाधिकारियों ने आपत्ति दर्ज करा दी। प्रीति पांडे ने कहा कि अगर ऐसा था तो शुरू में ही पीड़ित परिवार को क्यों नहीं बताया गया। केवल बिल बनाने के लिए भ्रम में रखा गया।
आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाना और फिर उसको मानने से इंकार कर देना अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। अगर उपचार न्यूरो का मिलना था तो अस्पताल में क्यों रखा गया। उसी दिन मरीज को शिफ्ट कर देना चाहिए था। संगठन इस पूरे मामले की जानकारी हाईकमान को देगा।
- प्रीति पांडेय, प्रदेश प्रमुख, प्रधानमंत्री जनकल्याणकारी योजना प्रचार प्रसार अभियान
- मामले की कोई जानकारी नही है। अगर कोई लिखित में शिकायत करेगा तो वह इसकी जांच कराकर कार्रवाई करने का काम करेंगे। यह सही है कि अस्पतालों ने अलग-अलग उपचार के लिए ब्रांच ली हुई है। - डॉ. राजकुमार, सीएमओ