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Meerut News: दर्द में है मरीज, कराह रहे वेंटिलेटर

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- स्टाफ के अभाव में नहीं चल रहे मेडिकल अस्पताल में रखे वेंटिलेटर
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- मेडिकल अस्पताल में 17 वेंटिलेटर रखे हुए हैं

संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। भले ही जिला अस्पताल को मेडिकल अस्पताल में संबद्ध कर दिया गया है। मगर, अस्पताल में मूल सुविधाएं अभी भी नगण्य हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अस्पताल में वेंटिलेटर होते हुए भी स्टाफ के अभाव में नहीं चल रहे हैं। जनमानस ने भी मरीजों के रेफर होने का दर्द बयां किया। वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने पर मरीज को रेफर कर दिया जाता है।

मेडिकल अस्पताल के वार्ड में कोरोना काल से 17 वेंटिलेटर रखे हुए हैं। सरकार ने अस्पताल में इन वेंटिलेटर की सुविधा गंभीर मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए की थी। मगर, ये वेंटिलेटर अस्पताल में रखे हुए धूल फांक रहे हैं। वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने पर मरीज को मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया जा रहा है।
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अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार सिर में गंभीर चोट, हार्ट अटैक सहित अन्य बीमारियों से संबंधित रोजाना करीब दो मरीज रेफर किया जा रहे हैं। इसके चलते पिछले छह में करीब 350 मरीज मेरठ, ऋषिकेश रेफर किए गए हैं। वेंटिलेटर चलाने के बाद देखरेख के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। इमरजेंसी से ही सीधे मरीजों की हालत गंभीर होने पर चिकित्सक रेफर कर रहे हैं।

केस नंबर एक
मई में एक कोचिंग सेंटर में टीचर को छात्र ने एकतरफा प्यार में गोली मार दी थी। टीचर का प्राथमिक उपचार कर उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। चिकित्सकों ने बताया कि हालत गंभीर मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता थी। इसलिए रेफर किया गया था।
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केस नंबर दो
पिछले सप्ताह सड़क हादसे में एक व्यक्ति के सिर में गंभीर चोट लग गई थी। उसे मेडिकल अस्पताल लाया गया। मगर हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे मेरठ रेफर कर दिया। उस मरीज को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती।

वेंटिलेटर नहीं चलने पर क्या बोले लोग
जिले के अस्पताल में ही हो सभी सुविधाएं
ओमप्रकाश ने बताया कि जिले में ही सभी सुविधाएं होनी चाहिए। अस्पताल में मरीजों को असुविधा न हो। इसका ख्याल रखा जाएं। स्टॉफ की कमी से वेंटीलेटर नहीं चल रहे हैं। स्टॉफ की तैनाती जाएं, ताकि मरीज को यही सुलभ इलाज मिल सके।

स्वास्थ्य सेवाओं में पिछड़ा जनपद
रवि शेखर तोमर का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जनपद पिछड़ा हुआ है। मेडिकल अस्पताल खुला हुआ है, लेकिन गंभीर रोगों के चिकित्सकों और उपकरणों की कमी है। इसे दूर किया जाएं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मरीजों को परेशान न होना पड़े।

मेडिकल अस्पताल में लोगों के उपचार के लिए जो संसाधनों या स्टॉफ की कमी है। उनकी पूर्ति के लिए इस संबंध में मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री से वार्ता की जाएगी। - चंदन चौहान, सांसद, बिजनौर लोकसभा
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मेडिकल अस्पताल से स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर ही मरीजों को रेफर किया जाता है। कोशिश रहती है कि अस्पताल में ही मरीज को सुलभ इलाज दिया जाए। स्टाफ आने पर गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर पर भर्ती करने की सुविधा भी शुरू कर दी जाएगी। - डॉ. मनोज सेन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बिजनौर
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