मेरठ। स्वच्छता सर्वेक्षण लीग 2021 में शहर की रैंक सुधारने के लिए नगर निगम के पास अब ढाई महीने से भी कम समय बचा है, लेकिन निगम उन बिंदुुओं पर भी काम करने में विफल साबित हो रहा है जिन बिंदुओं पर काम नहीं होने के चलते पिछले साल शहर बुरी तरह पिछड़ गया था। यहां तक की वर्तमान में चल रहे सिटीजन फीडबैक में भी वोटिंग नहीं कराई जा रही है। हालांकि नगर आयुक्त मनीष बंसल के आने से सफाई में तो इजाफा हुआ है लेकिन शत प्रतिशत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन, यूजर चार्ज वसूली, सीवेज नेटवर्क, खुले नाले और कूड़े के पहाड़ों का निस्तारण न होना शहर की अच्छी रैंक के आड़े आ सकता है।
पिछले साल अधिकारियों ने शहर की अच्छी रैंक लाने के लिए शहर के कूड़े का निस्तारण करने, डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करने, शहरवासियों पर यूजर चार्ज लगाने, सड़क पर कूड़ा डालने ओर जलाने पर चालान काटने, खुले नालों को खत्म करने, सीवेज नेटवर्क दुरुस्त करने के साथ ही गीला ओर सूखा कूड़ा अलग-अलग करने जैसे वादे किए थे। लेकिन ऐसा नहीं होने पर निगम को न केवल दस लाख से ज्यादा आबादी वाले 47 शहरों में 41 वां स्थान हासिल हुआ था, बल्कि देश के सर्वाधिक 10 गंदे शहरों में सातवें स्थान पर रहा था। इसके बाद निगम अधिकारियों ने स्वच्छता सर्वेक्षण लीग 2021 में सुधार करते हुए अच्छी रैंक लाने का दावा किया हुआ है।
कई बिंदुुओं पर मिले थे शून्य अंक
नगर निगम को पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण में कई बिंदुओं पर शून्य अंक मिले थे। इसमें सिटीजन फीडबैक, सर्विस लेबल प्रोग्रेस और सर्टिफिकेशन, सीवेज नेटवर्क, डायरेक्ट ऑबजर्बेशन, शत प्रतिशत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन एवं निस्तारण आदि शामिल थे।