एशियन गेम्स में दो पदक जीतने वाली इकलौता गांव की बेटी पारुल चौधरी कहती हैं कि रजत पदक लाकर मैं बहुत खुश थी, लेकिन उत्साह अगले दिन दौड़ में गोल्ड लाने के लिए था। रातभर नींद नहीं आई। सुबह पांच बजे सोई। अगले दिन जब मैं दौड़ रही थी तो अंतिम क्षण में मेरे दिमाग में बस यही था कि पारुल आज तेरे पास चांस है। अगर चूक गई तो डीएसपी बनने का सपना पूरा नहीं होगा। मैंने अपनी पूरी जान लगा दी और गोल्ड मेडल जीत लिया। आगे का लक्ष्य ओलंपिक में जीत हासिल करने का होगा।
पदक जीतकर गांव पहुंचीं गोल्डन गर्ल पारुल चौधरी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि गोल्ड के लिए दौड़ी तो शुरुआत में कुछ नर्वस थी, लेकिन बढ़ते कदमों के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ता गया। आगे जापानी धावक अच्छा दौड़ रही थी। अंत में दस सेकेंड बचे तो दिमाग में बस यही सोचा कि आज अगर मेडल नहीं मिला तो डीएसपी नहीं बन पाऊंगी, मेरा ये सपना टूट जाएगा। इसी सोच के साथ मैंने पूरी ताकत लगा दी और अंतिम क्षणों में देश के लिए गोल्ड मेडल जीत लिया।