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सर्दी में लकवे का वार: मेरठ मेडिकल में 10 दिन में आए 150 बीमार, चिकित्सक दे रहे ये सलाह

Thu, 02 Jan 2025 02:07 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

यह बीमारी गंभीर है और जान के खतरे के साथ जीवन भर की अपंगता भी इससे हो सकती है
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सर्दी - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में 22 दिसंबर से 31 दिसंबर 2024 तक (10 दिन) लकवे के 150 मरीज न्यूरोलॉजी (तंत्रिका विज्ञान) की ओपीडी में आए। इनमें से 125 को भर्ती करना पड़ा है। यह बीमारी गंभीर है और जान के खतरे के साथ जीवन भर की अपंगता भी इससे हो सकती है।
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मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. दीपिका सागर ने बताया कि करीब 70 प्रतिशत मरीजों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान व तंबाकू का सेवन, हृदय रोग, मानसिक तनाव, व्यायाम की कमी, महिलाओं में गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन आदि लकवे का कारण होते हैं, जबकि 30 फीसदी में लकवे का कोई निश्चित कारण नहीं होता है।
 

उन्होंने बताया कि सर्दी में रक्त का संचार सही से नहीं हो पाता है। इससे दिमाग की नसें सिकुड़ जाती हैं और रक्त के संचार में बाधा बनने के कारण लकवे का खतरा बढ़ जाता है। रोजाना ओपीडी और इमरजेंसी में 10 से 15 मरीज आ रहे हैं। लोगों को ठंड से बचाव करना चाहिए। इसके अलावा रक्तचाप और शुगर को नियंत्रण में रखना चाहिए।

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि हृदय रोग की तरह लकवे के इलाज में भी समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। अगर मरीज की रक्त नलिका में थक्का जमने के कारण लकवा हुआ और उसे तीन से चार घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो रोगी को थक्का घोलने वाली दवा दी जाती है, जिससे मरीज ठीक हो सकता है। ज्यादातर मरीजों में लकवे का बढ़ना रुक जाता है।
 
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30 फीसदी रोगियों को एक माह पहले मिल जाते हैं संकेत
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि करीब 30 फीसदी रोगियों को अगले कुछ महीने में लकवे की आशंका का संकेत मिल जाता है। अगर आधे अंग में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो रहा है, थोड़ी देर के लिए नजर की रोशनी कम हो जाना, कुछ वक्त के लिए समझने में तकलीफ होना, चक्कर, सिरदर्द, धुंधला दिखना, उल्टी आना आदि लकवे के संकेत हैं। इन्हें नजरअंदाज न करें।

इन बातों का भी रखें ध्यान
संतुलित आहार लें।
रोज 40-45 मिनट पैदल चलें।
नियमित व्यायाम करें।
तंबाकू, धूम्रपान न करें।
मानसिक तनाव कम लें।
बीपी, डायबिटीज हो तो नियंत्रण में रखें।
समय-समय पर चेकअप कराते रहें।
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