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भगवान का समर्पित किया निर्वाण लाडू

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हस्तिनापुर स्थित नवीन जिनमंदिर में भगवान विराजमान करते भक्तजन। - फोटो : MAWANA
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हस्तिनापुर। भगवान शांतिनाथ समवसरण जिन मंदिर के ऐतिहासिक महोत्सव का शुक्रवार को समापन हो गया। पंच कल्याणक समारोह के अंतिम दिन सुबह भगवान के मोक्ष कल्याणक की समस्त विधि संपन्न कराई गई। भगवान के मोक्षगमन के उपरांत सभी भक्तों ने भक्तिभाव के साथ पूजा कर निर्वाण लाडू समर्पित किया।
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गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा व आशीर्वाद से संपन्न हो रहे महोत्सव में प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी का विशेष मार्गदर्शन एवं पीठाधीश स्वस्तिश्री रवींद्र कीर्ति स्वामी जी का निर्देशन प्राप्त हुआ। मोक्ष कल्याणक के उपरांत मध्याह्न में विशाल रथयात्रा जुलूस का आयोजन किया गया। महिलाएं केसरिया साड़ी में और पुरुषों ने श्वेत वस्त्र पहनकर भाग लिया। सभी जिन प्रतिमा को नवीन जिन मंदिर में विराजमान किया। नवनिर्मित जिन मंदिर के शिखर पर कलश रोहण किया गया। इसमें पंच कल्याणक प्रतिष्ठा के पुण्यार्जक सुभाष चंद जैन साहू को ‘‘दानवीर शिरोमणि’’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। प्रतिष्ठाचार्य पं. विजय जैन एवं पं. दीपक जैन को भी सम्मानित किया।
रथयात्रा निकाली गई
जंबूद्वीप तीर्थ क्षेत्र पर मूलनायक भगवान की भव्य रथयात्रा निकाली गई। इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। जंबूद्वीप परिसर से भगवान को जयकारों के बीच नवनिर्मित शांतिनाथ समवसरण जिनालय में विराजमान किया गया। रथयात्रा तीन मूर्ति मंदिर से प्रारंभ होकर बड़े मंदिर हस्तिनापुर होते हुए सुमेरु पर्वत की परिक्रमा करते हुए समवसरण जिनालय पर सम्पन्न हुई। रथयात्रा में सबसे आगे श्रद्धालु ध्वज दंड, बैंडबाजे एवं बग्गियों में इंद्र-इंद्राणी विराजमान थे। उनसे आगे गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी एवं प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माता जी साध्वी संघ के साथ चल रही थीं। उनके पीछे मूलनायक भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा को लेकर सौधर्म इंद्र विराजमान थे।
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48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का शुभारंभ
हस्तिनापुर। ऐतिहासिक भूमि पर प्राचीन दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के कैलाश पर्वत पर विश्व की सुख, शांति व समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का 14वीं बार शुभारंभ किया।
48 दिवसीय भक्तामर विधान के मुख्य कलश लेने का सौभाग्य ललिता जैन, राजीव जैन को प्राप्त हुआ। प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य प्रीती जैन, पंकज जैन, शांतिधारा करने का सौभाग्य रमाकांत जैन, अरुणकांत जैन, मंजू जैन, विनोद जैन को प्राप्त हुआ। मंगल दीप प्रज्ज्वलन अरुणकांत, संगीतकांत द्वारा किया गया। भगवान आदिनाथ जिनालय में दीप प्रज्ज्वलन करने का सौभाग्य सलिल जैन, मधु जैन को मिला। विधान के प्रथम दिन 151 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया। इसमें 55 परिवार की ओर से प्रतिदिन विधान का आयोजन होगा। आज के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य पंकज जैन पालम दिल्ली को प्राप्त हुआ। सुनील जैन, रोहित जैन, पुष्पा जैन, रीना जैन, मित्रसेन परिवार दिल्ली, महेंद्र जैन हस्तिनापुर, प्रीती जैन पालम दिल्ली, कमला जैन हस्तिनापुर, मधु जैन देहरादून, ललिता जैन दिल्ली, मंजू जैन मेरठ, किरण दीदी, शांति देवी, रंजीता जैन ने पुण्य अर्जन किया। महाराज श्री ने बताया कि भक्तामर पाठ की महिमा अपरंपार है।
यात्रियों का किया मंगल तिलक
पावन शुभ बेला में आचार्य 108 श्री विद्यासागर जी महाराज, आचार्य भारत भूषण जी मुनिराज के मंगल आशीर्वाद से 108 श्री भावभूषण जी, क्षमा भूषण जी, निर्वाण भूषण जी, भव्य भूषण जी, समाधि सागर महाराज जी के सानिध्य में एवं सविता दीदी, माया दीदी के पावन निर्देशन व विधानाचार्य सुदीप, आशीष, विवेक शास्त्री के मंत्रोच्चारण के साथ श्री पंकज जैन पालम दिल्ली ने झंडारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उसके बाद तीर्थ क्षेत्र कमेटी के महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, विधान संयोजक मोतीलाल जैन ने विराजमान महाराज श्री के पावन चरणों में श्रीफल अर्पित किया। सुनील जैन प्रवीण जैन एवं विजय कुमार जैन ने यात्रियों का मंगल तिलक किया।
बच्चों ने किया वाचन
भक्तामर पाठ का वाचन गुरुकुल के नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा किया गया। सांयकलीन आरती का दीप प्रज्ज्वलन राजीव जैन, ललिता जैन, पंकज जैन, सलित जैन, मधु जैन, पुष्पा जैन, रीना जैन द्वारा किया गया। आज के प्रश्न मंच के पुरस्कार विपिन जैन की ओर से प्रदत्त किए गए। दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर एवं कैलाश पर्वत केस्टाफ का सहयोग रहा।
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